हिन्दू धर्म में गौतम बुद्ध

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बुद्ध धम्म के अनुसार बुद्ध कोई अवतार नहीं वो एक इंसान थे, बुद्ध उन बेकार के विषयो में कभी भी नहीं पड़ते थे जिनसे मनुष्य का हित न हो।

अब जाने की ब्राह्मणी धर्म/ हिन्दू धर्म/ सनातन धर्म में बुद्ध के क्या विचार हैं-

तथागत गौतम बुद्ध को हिन्दू धर्म के भविष्य पुराण में राक्षस कहा गया है।

गौतम बुद्ध को भी हिन्दुओं के वैष्णव सम्प्रदाय में को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।

दशावतार में वर्तमान में ९वाँ अवतार बुद्ध को माना जाता है। भविष्य में अंतिम कल्कि अवतार होगा।

गौतम बुद्ध, विष्णु के अवतार के रूप में

बुद्ध का उल्लेख सभी प्रमुख पुराणों तथा सभी महत्वपूर्ण हिन्दू ग्रन्थों में हुआ है। इन ग्रन्थों में मुख्यतः बुद्ध की दो भूमिकाओं का वर्णन है- युगीय धर्म की स्थापना के लिये नास्तिक (अवैदिक) मत का प्रचार तथा पशु-बलि की निन्दा। नीचे उन कुछ पुराणों में बुद्ध के उल्लेख का सन्दर्भ दिया गया है-

हरिवंश पर्व (1.41)

विष्णु पुराण (3.18)

भागवत पुराण (1.3.24, 2.7.37, 11.4.23) [7]

गरुड़ पुराण (1.1, 2.30.37, 3.15.26) [8]

अग्निपुराण (16)

नारदीय पुराण (2.72)

लिंगपुराण (2.71)

पद्म पुराण (3.252)[9]

तथापि हिन्दू ग्रंथों में जिन बुद्ध की चर्चा हुई है वे शाक्य मुनि (गौतम) से भिन्न हैं-

बुद्धोनाम्नाजनसुतः कीकटेषु भविष्यति (श्रीमद्भागवत)

इस भागवतोक्त श्लोकानुसार बुद्ध के पिता का नाम 'अजन' और उनका जन्म 'कीकट' (प्राचीन?) में होने की भविष्यवाणी की गयी है। जबकि बौद्ध ग्रन्थों के अनुसार गौतम बुद्ध के पिता का नाम शुद्धोदन था और उनका जन्म वर्तमान नेपाल में हुआ था।

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

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