हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद

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स्थापना[संपादित करें]

सन् १९५५ ई. में हैदराबाद राज्य में हिन्दी का प्रचार-प्रसार करने वाली प्राचीनतम साहित्यिक-शैक्षणिक संस्था 'हिन्दी प्रचार सभा, हैदराबाद' की स्थापना की गई। डॉ॰बी. रामकृष्णराव जब प्रदेश के मुख्यमंत्री हुए तब इस सभा को सरकारी सहायता मिलना आरम्भ हुआ। सभा का अपना एक विशाल भवन और प्रेस है। प्रतिकूल परिस्थितियों में सभा ने हिन्दी का प्रचार-प्रसार कर अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाया। सन् १९५६ से राज्यों के पुर्नसंगठन के कारण सभा में नवीन उत्साह का वातावरण बना। हैदराबाद राज्य का विलयन, महाराष्ट्र, आन्ध्र एवं मैसूर के नए राज्यों में हो गया और इनमें सभा की शाखाएँ प्रस्थापित हो गईं, लेकिन मुख्यालय हैदराबाद ही रहा।

कार्य[संपादित करें]

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा और हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग से सभा का निकट संबंध रहा है। भारत सरकार ने इसे अखिल भारतीय हिन्दी संस्था संघ के सदस्य के रूप में मान्यता दी है। सभा के द्वारा हिन्दी माध्यम से विद्यालय संचालित होते हैं। पाठ्यपुस्तकों, मौलिक-अनुदित ग्रंथों का भी प्रकाशन होता है। शब्दकोषों का निर्माण तथा अन्य भाषाओं के इतिहासों का प्रकाशन भी किया जाता है।

प्रकाशित पत्रिका[संपादित करें]

विवरण पत्रिका (मासिक),

संपादक : श्री धोण्डीराव जाधव

पता : सचिव, हिन्दी प्रचार सभा हैदराबाद, एल.एन.गुप्त मार्ग, नामपल्ली स्टेशन रोड, हैदराबाद-१ (तेलंगाना)

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]