सैनिक मनोविज्ञान

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सैनिक अभियानों के लिये आवश्यक मित्र या शत्रु के सशस्त्र बलों के व्यवहार का अध्ययन, समझ और अनुमान लगाने के प्रयुक्त मनोविज्ञान को सैन्य मनोविज्ञान या सैनिक मनोविज्ञान (Military psychology) कहते हैं। सैनिक मनोविज्ञान का उपयोग सेना के लोगों को परामर्श देने, उनके तनाव एवं श्रांति (थकान) को कम करने तथा सैन्य अभियानों के कारण आये मानसिक अभिघात (trauma ) की चिकित्सा के लिये भी किया जाता है। सैन्य-मनोविज्ञान, एक सैनिक के संपूर्ण क्रियाकलाप का वैज्ञानिक पद्धति से अध्ययन करता है। वह सैनिक के उत्साह, साहस, अनुशासन, भय, नेतृत्व आदि के विषय में मनोवैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

आधुनिक युद्धों का प्रमुख उद्देश्य शुत्र को अपनी नीतियों मानने के लिए तथा आत्मसमर्पण करने के लिये विवश करना होता है। क्योंकि आधुनिक युद्धों की सफलता केवल सैनिक कार्यवाहियों पर ही निर्भर नहीं होती, बल्कि उसमें मनोवैज्ञानिक तत्वों का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। मनोवैज्ञानिक उपायों का उपयोग कर शत्रु के मनोबल को तोड़ दिया जाता है। सैन्य कार्यवाही केवल युद्धकाल तक ही सीमित होती हैं, जबकि मनोवैज्ञानिक युद्ध शांतिकाल में भी चलती रहती है।

प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान मानसिक तनाव की स्थिति में युद्धभूमि से पलायन कर रहे सैनिकों के मनोबल को पुनः स्थापित करने के लिये सैन्य मनोविज्ञान का उपयोग किया गया। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान् सैनिकों के व्यक्तित्व परीक्षण एवम् अभिरूचि परीक्षण में सैन्य मनोविज्ञान की अहम् भूमिका रही थी। स्पष्ट है कि युद्ध और मनोविज्ञान का आपस में गहरा संबंध है और उन्हें अलग किया जाना संभव नहीं। आधुनिक सेना की रचना को देखते हुए यह अत्यंत आवश्यक प्रतीत होता है कि विभिन्न शाखाओं के संचालन हेतू अत्यधिक ज्ञान एवम् कुशलता की आवश्यकता है।

महर्षि शुक्राचार्य ने शुक्रनीति के अंतर्गत मनोवैज्ञानिक युद्ध के रूपों का उल्लेख किया है, यथा -

शत्रुसाधक हीनत्वकारणात् प्रबलाश्रयात्।
तद्वीनतोज्जीवनाच्च शत्रुभैदनमुच्यते॥
महर्षि के अनुसार शत्रु की प्रजा को साथ में करके, उनमें भेद डालकर, शत्रु को पीड़ा पहुँचाना अपनी विजय का कारण होता है।

मनोवैज्ञानिक युद्ध[संपादित करें]

"मन के हारे हार है, मन के जीते जीत"—शत्रु के मन पर विजय प्राप्त करने वाला सैनिक बिना लड़े युद्ध जीत जाता है और शत्रु साधन-संपन्न होने पर भी आत्म समर्पण के लिये बाध्य हो जाता है। सामान्यतया युद्ध में मनोवैज्ञानिक विधियों के माध्यम से शत्रु को कमजोर करने एवम् शत्रु द्वारा ऐसा करने से रोकने की मनोवैज्ञानिक विधियों के प्रयोग को ही मनोवैज्ञानिक युद्ध की संज्ञा दी जाती है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]