सुशीला कार्की

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माननीय न्यायमूर्ति

सुशीला कार्की


सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नेपाल [1]
कार्यकाल
13 अप्रैल 2016 – 06 जून 2017
द्वारा नियुक्त नेपाल की संवैधानिक परिषद[1]
उत्तराधिकारी माननीय न्यायमूर्ति कल्याण श्रेष्ठ [1]

जन्म जून 07,1952
ग्राम -शंकरपुर (विराटनगर),जिला:मोरांग [2], पूर्वी मैदानी क्षेत्र ,नेपाल

सुशीला कार्की (जन्म: 7 जून, 1952 को बिराट नगर) एक नेपाली महिला न्यायमूर्ति हैं। वे नेपाल सुप्रीम कोर्ट की प्रथम महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं। १३ अप्रैल २०१६ को नेपाल सुप्रीम कोर्ट की प्रथम महिला मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति की गयी [1] प्रधानमंत्री के पी ओली की अध्यक्षता में संबैधानिक परिषद ने नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद के लिए इनके नाम की संस्तुति की।[1][3] कार्की न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहिष्णुता के लिए जानी जाती हैं।

व्यक्तिगत जीवन[संपादित करें]

कार्की अपने पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी है। इनका सम्बन्ध किसान परिवार से है।[1] बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी ,भारत में अध्ययन के समय नेपाली कांग्रेस के प्रसिद्ध युवा नेता दुर्गा प्रसाद सुवेदी से मिलने के पश्चात इनका विवाह दुर्गा प्रसाद सुवेदी से हुआ।

  • पुत्र:प्रसान्त सुवेदी
  • निवास :धपसी, काठमांडू [2]

शिक्षा[संपादित करें]

इन्होने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञानं में एम ० ए ० की उपाधि प्राप्ति की।[4] वर्ष १९७८ में त्रिभुवन विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की उपाधि प्राप्त की [4]

व्यवसाय[संपादित करें]

प्रारम्भ में इन्होंने शिक्षण कार्य किया। 1979 में यह वकालत पेशे में आईं। सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति होने पहले कार्की सुप्रीम कोर्ट की बरिष्ठतम् न्यायाधीश थीं। [1] २२ जनवरी २०० ९ को सुप्रीम कोर्ट की अस्थायी जज बनीं और १८ नवंबर २०१० को स्थायी जज बन गईं। [4]

महाभियोग[संपादित करें]

३० अप्रैल २०१७ को कार्की के विरुद्ध संसद में महाभियोग प्रस्तुत किया गया और इसी के साथ नियमानुसार कार्की नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद से निलंबित हो गयीं।[5] [6]

सन्दर्भ[संपादित करें]