सुशीला कार्की
माननीय न्यायमूर्ति
सुशीला कार्की | |
सुशीला कार्की | |
नेपाल की प्रधानमंत्री | |
| पदस्थ | |
| कार्यभार ग्रहण १२ सितम्बर २०२५ | |
| द्वारा नियुक्त | नेपाल की संवैधानिक परिषद[1] |
|---|---|
| उत्तराधिकारी | माननीय न्यायमूर्ति कल्याण श्रेष्ठ [1] |
| प्रधान मंत्री | नेपाल के 39वें प्रधानमंत्री |
| पूर्व अधिकारी | खड्ग प्रसाद शर्मा ओली |
| जन्म | जून 07,1952 ग्राम -शंकरपुर (विराटनगर), जिला : मोरांग [2], पूर्वी मैदानी क्षेत्र ,नेपाल |
सुशीला कार्की (जन्म: 7 जून, 1952 को विराटनगर में) नेपाल की प्रधानमन्त्री[3] एवं पूर्व न्यायधीश हैं जो नेपाल की सर्वोच्च न्यायालय की प्रथम महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं। वे १३ अप्रैल २०१६ को नेपाल सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश नियुक्त की गयीं थीं। [1] प्रधानमंत्री खड्गप्रसाद ओली की अध्यक्षता में संवैधानिक परिषद ने नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद के लिए इनके नाम की संस्तुति की।[1][4] वे न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहिष्णुता के लिए जानी जाती हैं।
सितम्बर २०२५ में नेपाल में हुए विरोध प्रदर्शन और उसके बाद नेपाल के प्रधानमन्त्री के०पी० ओली के पद त्यागने के पश्चात, आन्दोलनकारियों ने श्रीमती सुशीला कार्की को अन्तरिम प्रधानमन्त्री बनाने के पक्ष में मतदान किया है।[5]
व्यक्तिगत जीवन
[संपादित करें]कार्की अपने माता-पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी हैं। इनका परिवार किसान परिवार था।[1] भारत के वाराणसी स्थित बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्ययन के समय दुर्गा प्रसाद सुवेदी से मिलने के पश्चात इनका विवाह उनके साथ हुआ। दुर्गा प्रसाद बाद में नेपाली कांग्रेस के नेता बने।
- पुत्र : प्रसान्त सुवेदी
- निवास : धपसी, काठमांडू [2]
शिक्षा
[संपादित करें]इन्होने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञानं में एम ० ए ० की उपाधि प्राप्ति की।[6] वर्ष १९७८ में त्रिभुवन विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की उपाधि प्राप्त की [6]
व्यवसाय
[संपादित करें]प्रारम्भ में इन्होंने शिक्षण कार्य किया। 1979 में यह वकालत पेशे में आईं। सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति होने पहले कार्की सुप्रीम कोर्ट की बरिष्ठतम् न्यायाधीश थीं। [1] २२ जनवरी २०० ९ को सुप्रीम कोर्ट की अस्थायी जज बनीं और १८ नवंबर २०१० को स्थायी जज बन गईं। [6]
महाभियोग
[संपादित करें]३० अप्रैल २०१७ को कार्की के विरुद्ध संसद में महाभियोग प्रस्तुत किया गया और इसी के साथ नियमानुसार कार्की नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद से निलंबित हो गयीं।[7] [8]
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- 1 2 3 4 5 6 "संग्रहीत प्रति". 16 अप्रैल 2016 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 17 अप्रैल 2016.
- 1 2 "संग्रहीत प्रति". मूल से से 20 अप्रैल 2016 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 22 अप्रैल 2016. सन्दर्भ त्रुटि:
<ref>अमान्य टैग है; "wikinepal.org" नाम कई बार विभिन्न सामग्रियों में परिभाषित हो चुका है - ↑ Pandey, Prateeti (14 September 2025). "Nepal PM News: नेपाल की PM बनते ही सुशीला कार्की ने Gen-Z को कर दिया खुश, पूरी कर दी सबसे बड़ी डिमांड". News18 हिंदी. अभिगमन तिथि: 14 September 2025.
- ↑ "संग्रहीत प्रति". 24 अप्रैल 2016 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 17 अप्रैल 2016.
- ↑ सुशीला कार्की बनेंगी नेपाल की पहली महिला प्रधानमन्त्री, आज ले सकती हैं शपथ
- 1 2 3 "संग्रहीत प्रति". 22 अप्रैल 2016 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 21 अप्रैल 2016.
- ↑ "संग्रहीत प्रति". 1 मई 2017 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2 मई 2017.
- ↑ https://thehimalayantimes.com/kathmandu/impeachment-proposal-filed-chief-justice-sushila-karki/