सुरभेदी भाषा

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सुरभेदी भाषा ऐसी भाषा को कहा जाता है जिसमें आवाज़ के सुर के बदलाव के आधार पर शब्दों और वाक्यों का अर्थ बदल जाता हो। चीनी भाषा विश्व की सब से अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली सुरभेदी भाषा है। भारत में पंजाबी और डोगरी जैसी पश्चिमी पहाड़ी भाषाएँ सुरभेदी होती हैं।[1][2] कुछ हद तक हर भाषा में सुरों के ज़रिये भावनाओं को प्रकट किया जाता है (जैसे कि ग़ुस्सा या दुख) लेकिन एक ही वर्णों वाले शब्दों का अर्थ सुरों के साथ केवल सुरभेदी भाषाओँ में बदलता है।

अन्य भाषाओँ में[संपादित करें]

अंग्रेजी में सुरभेदी भाषाओँ को "टोनल लैंगवेजिज़" (tonal languages) कहते हैं।

उदहारण[संपादित करें]

चीनी में "मा" शब्द का अर्थ सुर के बदलाव पर निर्भर करता है -

  • ऊंचे लेकिन बिना किसी बदलाव के सुर के साथ "मा" का अर्थ "माँ" है
  • चढ़ते हुए सुर के साथ "मा" का अर्थ "भांग" है
  • गिर कर फिर चढ़ते हुए सुर के साथ "मा" का अर्थ "घोड़ा" है
  • गिरते हुए सुर के साथ "मा" का अर्थ "डाँट" है
  • साधारण बिना बदलाव के सुर के साथ "मा" का मतलब है के बोलने वाला एक प्रश्न पूछ रहा है

अगर सुरों के बदलाव को तीरों से दिखाया जाए (↑ उठता हुआ, ↓ गिरता हुआ, ↔ बिना बदलाव के, ↺ गिरकर उठता hua), तो चीनी की एक पंक्ति इस प्रकार हो सकती है -

  • चीनी में - 妈妈骂马的麻吗?/媽媽罵馬的麻嗎?
  • सुरों के साथ - मामा↔ मा↓ मा↺ दे मा↑ मा?
  • अर्थ - क्या माँ घोड़े की भांग को डाँट रही है?

अगर किसी को सुरभेदी भाषाओँ की आदत न हो तो उसे इस पंक्ति में सिर्फ़ "मामा मा मा दे मा मा" का आभास होगा। उसे लगेगा के एक ही "मा" शब्द बार-बार दोहराया जा रहा है जबकि अलग-अलग सुरों की वजह से वास्तव में यहाँ पांच अलग शब्द कहे जा रहे हैं।

इसी तरह पंजाबी में भी सुरों का प्रयोग होता है -

  • "कोड़ा" बिना किसी सुर बदलाव के "कोड़ा" (यानि "चाबुक") का अर्थ रखता है
  • "कोड़ा" गिरकर फिर उठते सुर के साथ "घोड़ा" का अर्थ रखता है
  • "कोड़ा" उठते हुए सुर के साथ "कड़वा" का अर्थ रखता है

ध्यान रहे के इन्हें पंजाबी की दोनों (गुरमुखी और शाहमुखी) लिपियों में अलग-अलग लिखा जाता है, लेकिन इनका उच्चारण एक-सा होता है।[3] पंजाबी में पुछा जा सकता है "कोड़ा, कोड़ा के कोड़ा?" - अगर इनके सुर अलग-अलग ठीक से बोले जाएँ तो पंजाबी मातृभाषियों को इसका अर्थ "घोड़ा, चाबुक, या कड़वा?" समझ आ जाएगा जबकि संभव है के ग़ैर-पंजाबियों को लगे के एक ही शब्द तीन दफ़ा कहा गया है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Phonemic Inventory of Punjabi
  2. Geeti Sen. Crossing Boundaries. Orient Blackswan, 1997. ISBN 978-81-250-1341-9. Page 132. Quote: "Possibly, Punjabi is the only major South Asian language that has this kind of tonal character. There does seem to have been some speculation among scholars about the possible origin of Punjabi's tone-language character but without any final and convincing answer."
  3. [1]