सुप्त ग्रह

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

ज्योतिष के अनुसार जन्म कुण्डली के जिस घर में कोई ग्रह न हो तथा जिस घर पर किसी ग्रह की नज़र नहीं पड़ती हो उसे सुप्त घर या भाव माना जाता है।

लाल किताब के अनुसार सुप्त ग्रह से सम्बंधित फल तब तक प्राप्त नहीं होता है जब तक कि वह घर सक्रिय नहीं होता। लाल किताब में सोये हुए घरों को जगाने के लिए कई उपाय बताए गये हैं। परन्तु वैदिक ज्योतिष में इस प्रकार के विधान नहीं मिलते है। जो भाव खाली है उन भावों के कारको के अनुसार उनका फलादेश समझा जाता है और उन्ही के उपाय करके उन ग्रहों से संबंधित फलों को प्राप्त किया जा सकता है। जैसे कि यदि आपकी जन्म कुण्डली में पंचम भाव खाली है तो पंचम भाव के कारक बृहस्पति के अनुसार पंचम भाव का फलादेश कहा जायेगा।

सन्दर्भ[संपादित करें]