सुनीति चौधुरी

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सुनीति चौधुरी
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सुनीति चौधुरी
जन्म 22 मई 1917
कोमिला, ब्रिटिश राज
मृत्यु 12 जनवरी 1988 ( 70 वर्ष की आयु में)
प्रसिद्धि कारण १४ वर्ष की अल्पायु में एक ब्रितानी मजिस्ट्रेट की हत्या

सुनीति चौधुरी ( 22 मई 1917) भारत की एक क्रान्तिकारी नारी थीं। स्वतंत्रता संग्राम में बहुत कम अवस्था में बडा कारनामा करके दिखाने वाली सुनीति उस समय के प्रसिद्ध दीपाली संघ की सदस्या थीं। आजादी की लडाई में सुनीति चौधुरी का कारनामा सुनकर लोग आज भी दाँतों तले अँगुली दबा लेते हैं।

२४ दिसम्बर १९३१, त्रिपुरा

फैजुन्निसा बालिका विद्यालय की दो छात्राओं कुमारी शांति घोष और कुमारी सुनीति चौधरी ने मजिस्ट्रेट बी जी स्टीवेंसन से मिलने की अनुमति मांगी | कारण पूछने पर उन्होंने उत्तर दिया की वो लडकियों की तैराकी प्रतियोगिता के सन्दर्भ में उनसे कुछ बात करना चाहती हैं। मजिस्ट्रेट के कमरे में पंहुचते ही उन्होंने गोली चला दी। उन वीरांगनाओं का निशाना अचूक था, स्टीवेंसन वहीं मर गया। दोनों वीर बालाएं गिरफ्तार कर ली गयीं। २७ फ़रवरी १९३२ को उन्हें अजन्म काला पानी का दंड हुआ। सत्तावनी क्रांति के बाद यह पहली घटना थी जिसमे किसी महिला ने राजनीतिक हत्या की थी।

जहाँ इस वीरतापूर्ण कार्य की सराहना होनी चाहिए थी वहीँ गांधीवाद और अहिंसा के नशे में चूर सरदार बल्लभ भाई पटेल ने कहा कि ये दोनों लड़कियां भारतीय नारियों के लिए कलंक स्वरूप हैं। महान क्रांतिकारी मन्मथनाथ गुप्त जी लिखते हैं -" इतिहास ही बताएगा कि ये लड़कियां भारत के इतिहास का कलंक नहीं हैं | हाँ इस प्रकार का बयान अवश्य कलंक था |"