सुखविंदर अमृत
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| सुखविंदर अमृत | |
|---|---|
| जन्म | सुखविंदर कौर गांव सदरपुरा, पंजाब, भारत |
| पेशा | ग़ज़लकार |
सुखविंदर अमृत पंजाबी कवि, विशेष रूप से ग़ज़लकारा है। पंजाबी में आधुनिक बोध की ग़ज़ल सृजन में सुखविंदर अमृत एक चर्चित नाम है। [1]
जीवन के विवरण
[संपादित करें]सुखविंदर गांव सदरपुरा में पैदा हुई था। वह एक भाई और चार बहनें में सबसे बड़ी है। सुखविंदर अमृत का बचपन बहुत कठोर था। वह बचपन में ही गीत लिखने लग पढ़ी थी। एक दिन उसकी गीतों की कापी में उसकी मा के हाथ पड़ गई, जिसे उसने अलाव में जला दिया और सुखविंदर को खूब पीटा। इन दिनों का दर्द सुखविंदर की दो कविताएं 'हुण माँ' और 'उह पुरुष' में महसूस किया जा सकता है। [2]
रचनाएँ
[संपादित करें]कविता-संग्रह
[संपादित करें]- "कणीआं"
- "धुप्प की चुन्नी"
- "चिड़ियाँ"
- "धुआं"
- "सबक"
गीत-संग्रह
[संपादित करें]- सूर्य दी दहलीज
- चिरागाँ दी डार
- पत्तझड़ विच पुंगरदे पत्ते
- हजार रंगां दी लाट
- पुंनियाँ (2011)
- मामले की धूम (संपादित)
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "ਪੰਜਾਬੀ ਗ਼ਜ਼ਲ ਵਿਚ ਗੁਣਾਤਮਕ ਵਾਧਾ ਸੁਖਵਿੰਦਰ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਦਾ ਗ਼ਜ਼ਲ-ਸੰਗ੍ਰਹਿ 'ਹਜ਼ਾਰ ਰੰਗਾਂ ਦੀ ਲਾਟ' - ਸੁਰਿੰਦਰ ਸੋਹਲ". 18 दिसंबर 2018 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 26 मार्च 2017.
- ↑ date=ਜੂਨ 2011 "ਚੁੱਲ੍ਹੇ ਵਿੱਚ ਬਲਦੀਆਂ ਕਵਿਤਾਵਾਂ ਤੇ ਹਜ਼ਾਰ ਰੰਗਾਂ ਦੀ ਲਾਟ". ਸੀਰਤ, ਸੰ: ਸੁਪਨ ਸੰਧੂ.
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