साँचा:आज का आलेख ६ दिसंबर २०१०

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बाबा फकीर चंद
बाबा फकीर चंद (१८ नवंबर, १८८६ - ११ सितंबर, १९८१) सुरत शब्द योग अर्थात मृत्यु अनुभव के सचेत और नियंत्रित अनुभव के साधक और भारतीय गुरु थे।[1] [2] [3] वे संतमत के पहले गुरु थे जिन्होंने व्यक्ति में प्रकट होने वाले अलौकिक रूपों और उनकी निश्चितता के छा जाने वाले उस अनुभव के बारे में बात की जिसमें उस व्यक्ति को चैतन्य अवस्था में इसकी कोई जानकारी नहीं थी जिसका कहीं रूप प्रकट हुआ था. इसे अमरीका के कैलीफोर्निया में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर डॉ॰ डेविड सी. लेन ने नई शब्दावली 'चंदियन प्रभाव' के रूप में व्यक्त किया और उल्लेख किया. [4] [5] राधास्वामी मत सहित नए धार्मिक आंदोलनों के शोधकर्ता मार्क ज्यर्गंसमेयेर ने फकीर का साक्षात्कार लिया जिसने फकीर के अंतर्तम को उजागर किया. यह साक्षात्कार फकीर की आत्मकथा का अंश बना.[6] विस्तार में...
  1. द अननोइंग सेज-लाइफ एण्ड वर्क ऑफ बाबा फकीर चंद।पृष्ठ २०।२७ सितंबर, २००९
  2. द अननोइंग सेज-लाइफ एण्ड वर्क ऑफ बाबा फकीर चंद।पृष्ठ ५।२२ सितंबर, २००९
  3. chand.html. बाबा फ़कीरचंद, अवेकंड टीचर्स फ़ोरम, अभिगमन तिथि 2009-09-12, भाषा अंग्रेज़ी}}
  4. पृ.५।अभिगमन तिथि: २२ सितंबर, २००९
  5. chand.html "बाबा फकीर चंद" जाँचें |url= मान (मदद) (अंग्रेज़ी में). अवेकंड टीचर्स फोरम. अभिगमन तिथि 2009-09-12.
  6. p.69. अभिगमन तिथि 2009-10-31