साँचा:आज का आलेख १६ जनवरी २०१०

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हीमोडायलिसिस की एक मशीन
अपोहन या डायलिसिस रक्त शोधन की एक कृत्रिम विधि होती है। इस प्रक्रिया को तब अपनाया जाता है जब किसी व्यक्ति के गुर्दे सही से काम नहीं कर रहे होते हैं। गुर्दे से जुड़े रोगों, लंबे समय से मधुमेह के रोगी, उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियों में कई बार डायलसिस की आवश्यकता पड़ती है। स्वस्थ व्यक्ति में गुर्दे द्वारा जल और खनिज (सोडियम, पोटेशियम क्लोराइड, फॉस्फोरस सल्फेट) का सामंजस्य रखा जाता है। यदि डायलिसिस के रोगी के गुर्दे बदल कर नये गुर्दे लगाने हों, तो डायलिसिस की प्रक्रिया अस्थाई होती है। यदि रोगी की गुर्दे इस स्थिति में न हो कि उसे प्रत्यारोपित किया जाए, तो डायलिसिस अस्थायी होती है, जिसे आवधिक किया जाता है। ये आरंभ में एक माह से लेकर बाद में एक दिन और उससे भी कम होती जाती है। सामान्यतया दो तरह की डायलिसिस की जाती है पेरीटोनियल डायलिसिस और हीमोडायलिसिस। विस्तार में...