सन्निकटन

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किसी भी चीज के परिमाण को ठीक-ठीक (exact) मान के निकट के किसी मान के रूप में अभिव्यक्त करने को सन्निकटन (approximation) कहते हैं। इसे प्राय: चिंह द्वारा निरूपित किया जाता है। सन्निकटन उतना ही करना चाहिये कि सन्निकटन के बावजूद राशि का परिमाण उपयोगी बना रहे।

सन्निकटन की आवश्यकता एवं उपयोग[संपादित करें]

सन्निकटन का लाभ यह है कि राशि का मान लिखना/पढ़ना/याद रखना सरल हो जाता है। सन्निकटन इस दृष्टि से भी उपयोगी प्रक्रिया है कि अनेकों स्थितियों में राशियो के मान के बारे में अनेक प्रकार की अनिश्चितता होती है। इसके अलावा भौतिक जगत की बहुत सी समस्याएँ इतनी जटिल हैं कि उपलब्ध साधनों से या विश्लेषण-विधियों की सहायता से उनकी ठीक-ठीक गणना करना लगभग असम्भव है। कभी-कभी यदि राशि के परिमाण के लिये ठीक-ठीक व्यंजक भी ज्ञात हो तो भी सन्निकटन का सहारा इसलिये ले लिया जाता है कि सन्निकटन से प्राप्त मान भी पर्याप्त शुद्ध प्राप्त होता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]