सदस्य वार्ता:Agarwalm1711/प्रयोगपृष्ठ/1

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                                                         भादी अमावस्या

परिचय[संपादित करें]

Somvati Amavasya Vrat (सोमवती अमावस्या व्रत ).jpg

भादी अमावस्या[1] एक मारवाडी त्योहार है। भादी अमावस्या की मारवाडी समाज मे बहुत ही अधिक मानय्ता है। भादी अमावस्या को भादीमाव्स के दिन बनाया जाता है।

त्योहार मनाने के विधि[संपादित करें]

भादी अमावस्या के दिन साभी औरते अपने-अपने घरो से अपने सिर के उपर कलश रख के राणी सती माता के मन्दिर जाती है। और फिर वहा पे हवन होता है। राणी सती माता को कइ मारवाडी लोग अपनी कुल देवी भी मानते है। पुरा मारवाडी समाज भादी अमावस्या को बहुत ही धुम धाम से मनाते है।

इतिहास[संपादित करें]

हम सभि जनते है की हर त्योहार को मनाने के पिछे कोइ न कोइ कारण जरुर होता है। इसि तरह भदी अमावस्या को भी मनाने के पिछे एक बहुत ही बडी त्याग की कहानी है। राणी सती दादी का पुर्व जन्म मे उत्तरा नाम था। उनके पति क नाम अभिमन्यु था। अभिमन्यु युध की पुरी कला न सीख पाने के कारण वीरगती को प्राप्त हो गये तब उनकी पत्नि उअत्तरा गभ्र्वती थी इस कारण उस समय उनको सती होने से रोक लिया परन्तु उत्तरा इस बात से काफी नाराज हो गयी। तब सभी लोगो ने समझाया और कहा कि बेटी तुम गर्भवती हो और तुम्है एक बहुत ही अच्छा पुत्र होगा। परन्तु जब उत्तरा कीसी कि भी बात नही सुन रही थी तब श्री कृष्ण जी भगवान् ने उन्हे यह बताया की उन्के अग्ले जन्म मै उन्का फिर से अपने पति के साथ मिलन होगा। कलयुग मे उन्के पति का नाम तनधन होगा। उन्को यह भी बताया गया की तनधन जी के साथ उन्का विवाह होगा और उनकी मृत्यु विवाह के दिन ही हो जायेगी और फिर वो सती हो जयेगी।और फिर इसि प्रकार वष्र १३३८ मे कात्रिक शुक्ला नवमी के दिन नारायणी बाई का जन्म हुआ।और फिर मंगसिर नवमि के दिन नारायणी बाई का विवाह तनधन जी के साथ हुआ। विदाई के बाद जब नारायणी की डोली उन्के ससुराल जा रही थी तभि कुछ लुटेरो ने हमला कर दिया और उन्से लडते-लडते तनधन जी स्वर्ग सिध्धार गये। फिर नारायणी जी अपनी डोलि मे से निकल के उन्न बदमाशो से बद्ला लेति है और अपने पति के शव को लेके सती हो जाती है। जब वो सती होने वाली रेहती है तो सुरज डुबने वाला रेहता है परन्तु नारायणी जी अपनि शक्त्तियो से उसे अस्त होने से रोक लेति है।

राणी सती दादी की अन्तिम इच्छा[संपादित करें]

सती होने के पेहले उन्होने यह बोला था कि जो कोइ भी मेरे सतीस्थल के नाम से पुजा करेगा उस्की सारी मनोकामनाये पुरी की जयेगी। आज भी भादी अमावस्या के दिन झुझनु मे एक बहुत ही धुम धाम से मनाया जाता है। हर साल यहा पे बहुत बडे मेले का अयोजन होता है।

मनोकमना पुरी[संपादित करें]

राणी सती दादी जी की पुजा करने से सरी मनोकामनाए पुर्ण होती है। राणी सती माता का बहुत ही महात्म है और उनसे जिस भि कार्य के लिये मनोकामना करो वो जरुर हि पुर्न होती है।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. https://www.boldsky.com/yoga-spirituality/faith-mysticism/2013/significance-of-bhadon-amavasya-035103.html