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जयपाल सिंह[संपादित करें]

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अर्जुना पुरस्कार[संपादित करें]

अर्जुन पुरस्कार भारत में युवा मामलों और खेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा खेल में उत्कृष्ट उपलब्धि को पहचानने के लिए दिए जाते हैं। यह पुरस्कार उन खिलाड़ियों को दिया जाता है जो हॉकी, मुक्केबाजी, तीरंदाजी, एथलेटिक्स इत्यादि जैसे विभिन्न खेलों में उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं। उनमे से एक विजेता था श्री जयपाल सिंह।

व्यवसाय[संपादित करें]

श्री जयपाल सिंह को मुक्केबाजी के खेल में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए यह पुरस्कार मिला था। वर्ष 1986 में श्री जयपाल को इस प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित किया गया था। उन्हें इस पुरस्कार के लिए पात्र माना गया क्योंकि उन्होंने पिछले चार वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छी तरह से खेला था। इसके अलावा उन्होंने नेतृत्व, खेल कौशल और अनुशासन के गुण भी दिखाए हैं। श्री जयपाल सिंह पंजाब के निवासी है। वह पंजाब पुलिस के लिए काम करता है। इतना ही नहीं, वह पंजाब एमेच्योर बॉक्सिंग फेडरेशन के सचिव होने की भूमिका भी पूरा करता है। लेकिन पंजाब पुलिस में शामिल होने से पहले उन्होंने अर्जुन पुरस्कार जीता था। पुरस्कार जीतने की पांच साल बाद, यानि कि सन १९९१, में ही उन्होंने पंजाब पुलिस में दी. एस. पी. के पथ स्वीकार किया था।

उपलब्धियों[संपादित करें]

उनको पुरस्कार के रूप में ₹ 500,000 का नकद पुरस्कार,अर्जुन की कांस्य प्रतिमा और एक स्क्रॉल मिले थे। 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने के लिए सर्वश्रेष्ठमुक्केबाजों का चयन करने के लिए साथ प्रमुख मुक्केबाज़ियों के एक समिति बनाया गया था, जिसमें जसलाल प्रधान, महताब सिंह, बी. आई. फर्नॅंडेज़, जी.एस. संधू, कर्नल पी.के मुरलीधरन राजा, भूपिंदर सिंह के साथ श्री जयपाल सिंह बी शामिल थे। 2015 में, श्री जयपाल सिंह के साथ किशन नरसी को भारतीय मुक्केबाजी के राष्ट्रीय चयन पैनल का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया गया था। उस समय वे दोनों बॉक्सिंग इंडिया के उपाध्यक्ष थे। इससे पहले, श्री जयपाल सिंह ने पंजाब बॉक्सिंग एसोसिएशन के महासचिव के रूप में भी कार्य किया था। सन में श्री जयपाल सिंह को पंजाबी सर्कार ने महाराजा रंजीत सिंह पुरस्कार से सम्मानित्त किया गया था। यह पुरस्कार पंजाब सर्कार से दिए गए सबसे ऊँचा पुरस्कार है। पंजाब ओलिमिक्स एसोसिएशन के 'हॉल ऑफ़ फेम' में १६० खिलाडियों के नाम थे। श्री जयपाल सिंह उस सूची की तैयारी में शामिल थे।

प्रभाव[संपादित करें]

श्री जयपाल सिंह हम सभी के लिए एक प्रेरणा है। उनकी सफलता हमें सिखाती है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के साथ, इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। जो लोग खेल और मुक्केबाजी में रूचि रखते हैं, उन्हें श्री जयपाल सिंह को एक आदर्श माना जाना चाहिए। सरकार ऐसे लोगों को पुरस्कृत करके एक महान काम कर रही है क्योंकि यह न केवल उन्हें प्रेरित करती है बल्कि अन्य लोगों को उनके जैसे बनने की कोशिश करने और सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है। खेल को भारत में बहुत महत्व नहीं दिया जाता है, लेकिन ऐसे पुरस्कार यह सुनिश्चित करते हैं कि लोग खेल गंभीरता से लेना शुरू करें और अपने बच्चों को अपनी पसंद के विभिन्न खेलों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करें।

संदर्भ[संपादित करें]

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[2]

  1. http://www.punjabpolice.gov.in/PDFViwer.aspx?enc=WFo5b4QDVWRHx+1tizZkVZqdasLj+hWQIb55x0U+MqkHDh3EflADLP8sV03ZHAKf5EgJRk4q3cxyMZIqfM3bcF6tPaC2z6fq12FiVwQh/2oEdF5nOC/b1La96dkIzYDvSSgRLGCgdkh+uY2UIBX300DJyKUNCxUr98ByoDpY9l8=
  2. https://timesofindia.indiatimes.com/news/Indian-boxing-federation-announces-team-for-Commonwealth-Games-and-Asian-Games/articleshow/6467842.cms