संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रस्ताव ६८/२६२

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संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रस्ताव ६८/२६२
  • तिथि: २७ मार्च २०१४
  • बैठक संख्या: ८० वां पूर्ण
  • कोड: A/RES/68/262
  • दस्तावेज़ : [1]
  • मत पक्ष में : १००
  • तटस्थ: ५८
  • मत विपक्ष में: ११
  • अनुपस्थित:२४
  • विषय: यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता
  • परिणाम: प्रस्ताव पारित

संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रस्ताव ६८/२६२ यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता पर संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव है जो क्रीमिया के रूसी विलय के जवाब में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अड़सठवें सत्र द्वारा 27 मार्च, 2014 को अपनाया गया। प्रस्ताव में क्रीमिया की हैसियत में बदलाव को मान्यता नहीं देने की मांग की गई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव पर मतदान हुआ जिसमें क्रीमिया के रूस में विलय को मान्यता नहीं दी गई। संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित प्रस्ताव के पक्ष में 100 वोट पड़े और 11 विरोध में, जबकि 58 सदस्य तटस्थ रहे।[1]

यह संकल्प कनाडा, कोस्टा रिका, जर्मनी, लिथुआनिया, पोलैंड और यूक्रेन द्वारा प्रस्तुत किया गया था।[2] रूस ने इस प्रस्ताव को 'शीतयुद्ध कालीन प्रचार का हथकंडा' कहा जिसका इस्तेमाल 'यूक्रेन में गंभीर राजनीतिक संकट' को छिपाने के लिए किया गया था। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के बीच गहरा मतभेद है। बड़ी संख्या में सदस्य या तो तटस्थ रहे या मतदान से गैरहाजिर रहे। यह इस बात का सबूत है कि यूक्रेन की घटनाओं की एकतरफा व्याख्या को स्वीकार नहीं किया गया। क्रीमिया संकट से निपटने के लिए बुलाई गयी सात सत्रों की इस बैठक को केवल रूसी वीटो का सामना करना पड़ा।[3]

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