शैलशिल्प (चित्र)

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युनेस्को विश्व धरोहर स्थल
विश्व धरोहर सूची में अंकित नाम
हाथीजैसे आकार का शैल शिल्प चित्र
देश Flag of India.svg भारत
प्रकार सांस्कृतिक
युनेस्को क्षेत्र कोकण (महाराष्ट्र)



शैलशिल्प (चित्र) यह प्राक इतिहासकालींन संकल्पना है | पत्थरों में खुदाई करके यह शिल्प बनायी गई है | यह चित्र बनानेका कारण इतिहाससे पता लगाना कठीन है | पशु, पक्षी, समझ में न आनेवाली आकृतियाँ इन चित्रोंमें नजर आती है|भीमबेटका के शिल्प जागतिक स्थल नामके घोषित है | राॅक आर्ट (Rock Art)तथा पेट्रोग्लिफ्स(petroglyphs)इस नामसे यह चित्र जाने जाते है | ऐसे चित्र महाराष्ट्र राज्यके कोकण प्रांतमें ज्यादातर दिखाई देते है|[1]

कोकण प्रांतकी शैल शिल्प (चित्र)[संपादित करें]

महाराष्ट्र राज्य के कोकण प्रांतमें रत्नागिरी, लांजा, राजापूर, देवगड़ और सिंधुदुर्ग जिलोमें सबसे ज्यादा शैलशिल्प है |

जयगड, चवे, रामरोड, करबुडे, मासेबाव, निवळी, गोळप, निवळी गावडेवाडी, कापडगाव, उमरे, कुरतडे, कोळंबे, गणेशगुळे, मेर्वी, गावखडी, डोर्ले इ.

  • राजापूर

देवाचे गोठणे, सोगमवाडी, गोवळ, उपळे, साखरे कोंब, विखारे गोठणे, बारसू, पन्हाळे ,शेडे, कोतापूर, देवीहसोळ इ.

  • लांजा तालुका-

भडे, हरचे, रूण, खानावली, रावारी, लावगण इ. देवगड और सिंधुदुर्ग इलाकेमें अभीभी संशोधन जारी है |[2]

काल निर्धारण[संपादित करें]

मध्य अश्मयुगीन कालकी ईसापूर्व १०००० वर्ष पुरानी यह चित्र है ऐसा विद्वतजन कहते है |

संशोधनका भौगोलिक क्षेत्र[संपादित करें]

कोकण प्रांतके पर्वतीय पठार पर यह संशोधन कार्य जारी है । ३७०० चौ कि मी व्यापित क्षेत्र में यह संशोधन हो रहा है ।

विशेषताएं[संपादित करें]

  • यह सब शिल्प शैल के ऊपरी हिस्से में जमीनपर बनाएँ गए है |
  • पशु आकृति पशुके नैसर्गिक आकार में ही बनाई गई है |
  • पक्षी आकृति में पक्षीके नैसर्गिक आकार से बड़ी आकार में आकृति बनाई गई है |
  • कोकण प्रांतमें दिखाई न देनेवाले प्राणी तथा पक्षी इन आकृतियोंमें दिखाई देते है |
  • यह चित्रशैली पोर्तुगाल,ओस्ट्रेलिया की शैल्शिल्पसे मिलीजुली लगती है |

संशोधन कार्य[संपादित करें]

राजापूर, रत्नागिरी व लांंजा ऐसे ४२ गावोंमें ८५० शैल शिल्प मिले है | शोधकर्ता सुरेंंद्र ठाकुरदेसाई, धनंंजय मराठे और सुधीर रिसबूड इन्होंने हर गांवमें जाकर इन शिल्पचित्रोंकी खोज की है |[3]

यह भी देखिए[संपादित करें]

कोकण

भीमबेटका

बाहरी कड़ी[संपादित करें]

रत्नागिरी पर्यटन स्थल

चित्रदालन[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "कोकणातील कातळशिल्पे (मराठी)".
  2. "राजापुरात पुन्हा आढळला कातळशिल्पांचा खजिना". २३.३. २०१८. |date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  3. रिसबुड, ठाकुरदेसाई, मराठे. "अशमयुगीन मानवी अस्तित्वाच्या पाऊलखुणांचा शोध-कातळ-खोद-शिल्प".