व्यक्तस्वामी

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व्यक्तस्वामी भगवान महावीर के चतुर्थ गणधर थे।[1] वे अपने ५०० शिष्यो के साथ भगवान महावीर के शिष्य बने। वह भारद्वाज गोत्रिय ब्राह्मण थे।

व्यक्तस्वामी की शंका[संपादित करें]

प्रत्येक गणधर को अपने ज्ञान में कोई ना कोई शंका थी, जिसका समाधान भगवान महावीर ने किया था, व्यक्तस्वामी के मन में शंका थी कि, पंचभूत आदि तत्व होते हैं या नहीं ?

सन्दर्भ[संपादित करें]