"रुहोल्ला खोमैनी": अवतरणों में अंतर

नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ
7 बाइट्स हटाए गए ,  11 वर्ष पहले
सम्पादन सारांश नहीं है
छो (r2.7.1) (robot Modifying: fa:سید روح‌الله خمینی)
No edit summary
== आदि जीवन ==
[[चित्र:Ayatollah Khomeini young.jpg|right|thumb|युवा अयतोल्ला ]]
रुहोल्ला खोमैनि का जन्म [[खोमैन]] शहर में हुआ था । [[तेहरान]] के दक्षिण से खोमैन ३०० की.मीकिमी था । उनके पिता का नाम [[अयतोल्ला]] सय्यद मुस्ताफ़ा मुसावि था और उनकी मामाँ का नाम हज्जे आघा खानुम था । रुहोल्ला जी [[सैय्यद]] थे, और उनका परिवार [[मुहाम्मदमुहम्मद]] का वंशज था वे अन्तिम इमाम (इमाम मूसा कानम) से थे । उनके दादा [[सैय्यद]] [[आख्मद मूसावि हिंदि]], [[उत्तर प्रदेश]] के किन्तूर गांव में जन्मे थे । हिंदी 1834 में [[ईरान]] आए और 1939 में [[खोमैन]] में घर लिया । उनकी तीसरी पत्नी, सकिने ने, मुस्ताफ़ा को १८५६ में जन्म दिया । खोमैनि के नाना ''मिर्ज़ा आख्मद मोज्तहेद-ए-खोंसारी'' जी थे। मिर्ज़ा खोंसरी मध्य ईरान में बहुत अच्छे इमाम थे ।
 
मार्च 1903 में, पंच मास रुहोल्ला के जन्म के बाद , लोगों ने उसके पिता की हत्या कर दी <ref>{{En}}[http://www.iranchamber.com/history/rkhomeini/ayatollah_khomeini.php अयतोल्ल रुहोल्ला मुसावी खोमैनी] - ईरान इतिहास परिषद</ref> । रुहोल्ला की माँ व नानी ने उनको पाला। छठे साल से उनकी कुरान व फ़ारसी भाषा की शिक्षा शुरु हुई । उनकी प्रारंभिक शिक्षा [[मुल्ला]] अब्दुल कसीम व [[शैख]] जफ़्फ़र के साथ हुई । रुहोल्ला की माँ व नानी का तब देहान्त हो गया जब वे 15 वर्ष के थे । इसके बाद वे अयतोल्ला के साथ रहने लगे| जब वे 18 के हुए तो ईस्लामी शिक्षा प्राप्त करने के लिये अरक मादिसे में गये। उनके गुरु [[अयतोल्ला]] [[अब्दुल-करिम हैरि-यज़्दि]] थे ।
 
1921 में , अरक उंच्च मद्रसा, में उन्होने इस्लामी पढाई शुरु की । 1922 में उन्होने और उनके गुरु ने माद्रसा अरक छोड़ कर कोम में एक नया माद्रसा बनाया । खोमैनि ने दार-अल-शाफ़ा विद्यालय में पढाई की । इसके बाद नाजफ़, [[ईराक़]] को चल दिये । पढाई के बाद वे फ़िख, फ़िलासफ़, सूफ़ी, व शरीअ को पढाया ।
 
खोमैनि ने शिक्षा में राजनीति व धर्म के साथ का समर्थन किया । उनका आदर्श शासन [[धर्मतंत्र]] था ।
 
== राजनीतीराजनीति में ==
1961 में, अयतोल्ला सायद मुहाम्मद बुरुजेर्दी की मृत्यु हुई । एक साल के बाद अयतोल्ला अबोल-हशेम कशानी की मृत्य भी हो गयी । इस वक़्त , अयतोल्ला 60 वर्ष के हो गये थे । फिर उन्होने नेत्रित्व का मार्ग चुना , दो इमाम की मृत्य के बाद ईरान के [[शाह इमाम]] को यह रास नहीं था । इमामों को नाराज होता देख रेज़ा पहलवी का _____ को । पह्लवी के पुत्र [[मोहाम्मद रेज़ शा]] जी थे , उन्होने [[इंक़िलाब-ए-सफेद]] इमाम को परेशानियाँ दीं ।
 
गुमनाम सदस्य

नेविगेशन मेन्यू