वायरलेस उर्जा हस्तांतरण

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क्यूई प्रणाली, के पास मैदान वायरलेस हस्तांतरण का एक उदाहरण। फोन पैड पर सेट है, जब पैड में एक तार एक चुंबकीय क्षेत्र है जो एक और तार में एक मौजूदा लाती है, फोन में , इसकी बैटरी चार्ज पैदा करता है।

वायरलेस उर्जा हस्तांतरण (WPT) या वायरलेस ऊर्जा संचरण विद्युत् उर्जा का प्रवाह है उर्जा के स्तोर्त से विद्युत् से विद्यतभार या फिर उर्जा खर्च करने वाले यन्त्र पर इस संचरण में मानव निर्मित सुचालकों का इस्तेमाल नहीं होता ताररहित उर्जा संचरण उन सभी मामलों में बहुत उपयोगी होता है जहाँ बहुत सारे तारों के चलते दुर्घटना की सम्भावना बहुत रहती है वायरलेस उर्जा हस्तांतरण की तन्किन दो प्रकार की होती हैं- गैर विकिरण और विकिरण।

इतिहास[संपादित करें]

1826 में आन्द्रे मैरी एम्पीयर ने एम्पीयर का नियम विकसित कर यह बताया की विद्युत प्रवाह एक चुंबकीय क्षेत्र पैदा करता है। [1]

माइकल फैराडे ने 1831 फैराडे का इंडक्शन नियम प्रतिपादित किया। 1862 में जेम्स क्लर्क मैक्सवेल ने इन प्रयोगों और बिजली, चुंबकत्व और प्रकाशिकी के समीकरणों संश्लेषित कर मैक्सवेल के समीकरण के नाम से जाना जाता है। यही सब नियमें आधुनिक विद्युतचुम्बकीय अध्यन का सूत्रधार बनी जिसमे विद्युत ऊर्जा का वायरलेस उर्जा हस्तांतरण का भी शामिल हैं [2] मैक्सवेल ने अपनी किताब ऐ ट्रिअतिज़ ओं इलेक्ट्रिसिटी & मैग्नेतेज्म में विद्युत् चुम्बकीय तरंगों के बारे में बहुत पहले बता दिया था। 1884 में जॉन हेनरी पोइंटिंग ने विद्युत् चुम्बकीय चुम्बकीय क्षेत्र में उर्जा प्रवाह के लिए उर्जा नियमों का प्रतिपादन किया था 1888 हेनरिक रुडोल्फ हर्ट्ज ने रेडियो तरंगों की खोज की पुष्टि की जो मैक्सवेल के विद्युत चुम्बकीय तरंगों की भविष्यवाणी को सत्यापित करता था। [3] निकोल टेस्ला ने बेतार उर्जा संचरण के क्षेत्र में पहला प्रयोग २०वी सदी के अंत में किया. १८९१-१८९८ के बीच उन्होंने तार रहित उर्जा संचारों का प्रयोग अपने रेडियो फ्रीक्वेंसी रेज़ोनेंत ट्रांसफार्मर के माध्यम से किया जिससे टेक्सला कोइल बोला जाता हैं

१८९९ ने अपने प्रयोग का हस्तांतरण कोलराडो स्प्रिंग कोलराडो में कर लिया. यही पर उन्होंने कई सारे प्रयोग किये.

सुदूर क्षेत्र विकिरण तकनीक[संपादित करें]

माइक्रोवेव[संपादित करें]

द्वितीय विश्व युद्ध के पहले वायरलेस उर्जा हस्तांतरण के क्षेत्र में बहुत कम कार्य हुआ था रेडियो का प्रयोग संचार माध्यम के रूप में किया जा रहा था लेकिन बेतार उर्जा हस्तांतरण में इसका प्रयोग नहीं हो रहा था

संधर्भ[संपादित करें]

  1. रिचर्ड फिट्ज़पैट्रिक (२००७). "एम्पीयर का नियम". मूल से 10 जून 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2 सितंबर 2016.
  2. तोमर, अनुराधा; गुप्ता, सुनील (जुलाई २०१२). "वायरलेस पावर ट्रांसमिशन: ऍप्लिकेशन्स एंड कंपोनेंट्स". इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ इंजीनियरिंग रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी. 1 (5). आइ॰एस॰एस॰एन॰ 2278-0181. मूल से 26 अगस्त 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि ९ नवम्बर २०१४.
  3. अंगेलो, जोसफ ए. (२००९). इनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी. इन्फ़ोबेस पब्लिशिंग. पपृ॰ 292–293. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ १४३८११०१८९ |isbn= के मान की जाँच करें: invalid character (मदद). मूल से 17 मई 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2 सितंबर 2016.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]