वानर

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वानर का अर्थ बंदर होता है।

मूल[संपादित करें]

वानर शब्द का संधि विच्छेद नहीं किया जा सकता है क्योंकि संधि विच्छेद केवल उन शब्दों का हो सकता है जिनको तोड़कर दो सार्थक शब्द बन सकें।

इसका शाब्दिक अर्थ होता है - "बंदर"। इसी तथ्य के आधार पर महात्मा रामचन्द्र वीर ने "हनुमान जी की जाति वानर बतायी है और इसी आधार पर राजस्थान के विराटनगर में नर स्वरुप में हनुमान जी की मूर्ति वज्रांग मन्दिर मे स्थापित की है। यह मन्दिर पूरे भारतवर्ष मे हनुमान जी के अन्य मन्दिरों से अलग है।

अन्य अर्थ[संपादित करें]

"वानर" शब्द का अर्थ "बन्दर" भी होता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]