लियोनार्ड सस्किंड

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लियोनार्ड सस्किंड (Leonard Susskind)

Leonard Susskind
जन्म दक्षिण ब्रोंक्स, न्यू याॅर्क, USA
आवास यूनाइटेड स्टेटस
नागरिकता यूनाइटेड स्टेटस
राष्ट्रीयता अमेरिकन
जातियता यहूदी अमेरिकन
क्षेत्र भौतिक विज्ञान, गणित
संस्थान Yeshiva University
Tel Aviv University
Stanford University
Stanford Institute for Theoretical Physics
Korea Institute for Advanced Study
Perimeter Institute for Theoretical Physics
शिक्षा City College of New York
Cornell University
डॉक्टरी सलाहकार Peter A. Carruthers
प्रसिद्धि Holographic principle
String theory
String theory landscape
Color confinement
Hamiltonian lattice gauge theory
उल्लेखनीय सम्मान Pomeranchuk Prize (2008)
American Institute of Physics' Science Writing Award
Sakurai Prize (1998)
Boris Pregel Award, New York Academy of Sciences (1975)

१९४० में जन्मे लियोनार्ड सस्किंड सैद्धांतिक भौतिकी में स्टैनफोर्ड संस्थान (Stanford University) के फेलिक्स बलोच (Felix Bloch) प्राध्यापक है और स्टैनफोर्ड विष्वविधालय(Stanford University) के निर्देषक भी है। इनके शोध हितों में स्ट्रिंग सिद्धात (String_theory) क्वांटम स्टेट सिद्धात (quantum state theory), क्वांटम सांखियकीय यात्रिकी (quantum statistical mechanics) और क्वांटम ब्रह्राण्ड विज्ञान (quantum cosmology) शामिल हैं। यह अमरीका की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (United States National Academy of Sciences), और कला और विज्ञान के अमेरिकन अकादमी (American Academy of Arts and Sciences) के एक सदस्य है, सैद्धांतिक भौतिकी के लिए कनाडा की परिधि संस्थान(Canada's Perimeter Institute for Theoretical Physics) के संकाय के एक सहयोगी सदस्य, और उन्नत अध्ययन के लिए कोरिया संस्थान (Korea Institute for Advanced Study) के एक प्रतिषिठत प्राध्यापक है।

सस्किंड व्यापक रूप से सिट्रंग सिद्धांत(string theory) के पिता के रूप में माने जाते हैं, योइचिरो नाम्बु (Yoichiro Nambu) और होल्गर बेच निएल्सेन (Holger Bech Nielsen) के साथ में स्वतंत्र रूप से 'कण वास्तव में एक आपेक्षिकीय सिट्रंग की उजना के राज्यों (state of excitation of a relativistic string) में हो सकता है' का विचार पेष किया। उन्होंने २००३ में स्ट्रिंग थ्योरी लैंडस्केप (string theory landscape) के विचार को लागू करने के लिए पहली बार बोले थे। ससिसकंद १९९८ में जे जे सकुराए (J. J. Sakurai) पुरस्कार से सम्मानित किये गए थे।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा[संपादित करें]

न्यूयाॅर्क (New York) शहर के दक्षिण ब्रोंक्स ( South Bronx) अनुभाग से एक यहूदी परिवार में लियोनार्ड सस्किंड का जन्म हुआ था। वह अब पालो अल्टो, कैलिफोर्निया (Palo Alto, California) में रहते हैं। १६ साल की उम्र में एक प्लम्बर के रूप में काम करना शुरू किया। बाद में, वह एक बी एस (B.S) स्नातक के साथ एक अभियंता छात्र के रूप में न्यूयाॅर्क के सिटी काॅलेज में दाखिला लिया। १९६५ में वह अपने Ph.d के लिए पीटर ए काररूथर्स(Peter A. Carruthers) तहत काॅर्नेल विष्वविद्यालय (Cornell University) में अध्ययन करने गए।

कैरियर[संपादित करें]

सस्किंड शुरुआत में एक सहायक प्राध्यापक थे और उसके बाद १९६६–१९७० में येशिवा विश्वविद्यालय (Yeshiva University) में सहायक प्राधयापक बने रहे। उसके बाद वे एक साल के लिए तेल अवीव विश्वविद्यालय (University of Tel Aviv) गए। सस्किंड फिर से येशिवा विश्वविद्यालय (Yeshiva University) में प्राध्यापक बनने के लिए लौटे(१९७०–१९७९)। १९७९ के बाद से वह स्टैनफोर्ड विष्वविद्धालय (Stanford University) में भौतिकी के प्रोफेसर है और १९७९ के बाद से भौतिकी के फेलिक्स बलोच (Felix Bloch) प्राध्यापक पद पर कार्य कर रहे हैं।

सस्किंड अपने सिट्रंग माडल (Stirng Model), लैटिस गेज थ्योरी (lattice guage theory) क्वांटम क्रोमोद्य्नामिक (Quantum Chromodynamic) और डायनैमिकल सिमिट्री ब्रेकिंग (dynamical symmetry breaking) में अग्रणी योगदान के लिए १९९८ में जे जे सकुराए (J.J. Sakurai) पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। २००७ में सस्किंड एक सहयोगी सदस्य के रूप में, वाटरलू, ओंटारियो, कनाडा(Waterloo, Ontario, Canada) में सैद्धांतिक भौतिकी के परिधि संस्थान (Perimeter Institute for Theoretical Physics) के संकाय में शामिल हो गए। उन्हें नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज ( National Academy of Sciences) और कला और विज्ञान के अमेरिकन अकादमी (American Academy of Arts and Sciences) के लिए भी चुना गया है। वे कोरिया संस्थान (Korea Institute for Advanced Study) में एक प्रतिषिठत प्रोफेसर भी है।

सैद्धांतिक न्यून्तम व्याख्यान श्रृंखला (The theoretical Minimum Lecture Series)[संपादित करें]

सस्किंड सैद्धांतिक न्यून्तम के रूप में आधुनिक भौतिकी के बारे में स्टैनफोर्ड (Stanford) जारी रखने के अध्ययन पाठयक्रम की एक श्रृंखला सिखाता हैं। पाठयक्रमों का लक्ष्य भौतिक विज्ञान के कुछ क्षेत्रों का अध्ययन करने के लिए आवष्यक बुनियादी लेकिन कठोर सैद्धांतिक नींव सिखाना है। ब्लैक होल (Black Hole) के भौतिकी सहित क्लासिकल मैकेनिक्स (Classical Mechanics), रिलेटिविटी (Relativity), क्वांटम मैकेनिक्स (Quantum Mechanics), स्टैटिस्टिकल मैकेनिक्स (Statistical Mechanics), कॉस्मोलॉजी (Cosmology) को शामिल किया गया।

वैज्ञानिक कैरियर[संपादित करें]

सस्किंड उन तीन भौतिकी में से एक थे जिंनहाने ने यह खोजा था की वेनेज़िआनो ड्यूल(Veneziano dual), रेजोनेंस मोड (resonance mode) और स्ट्रिंग इन्ट्रक्शन्स(strong interactions)को क्वांटम मैकेनिकल मॉडल ऑफ़ स्ट्रिंग्स(quantum mechanical model of strings) के द्वारा समझाया जा सकता हैं। वह पहले व्यक्ति थे जिंनहाने स्ट्रिंग सिद्धांत का विचार रखा था।

सस्किंड ने भौतिकी के इन क्षेत्र में योगदान दिया हैं -

1.कण भौतिकी के स्ट्रिंग सिद्धांत मॉडल की स्वतंत्र खोज (The independent discovery of the string theory model of particle physics)

2.क्वार्क कॉन्फिनेमेंट प्रसूति के सिद्धांत (The theory of quark confinement)

3.हमिल्टोनिअन लैटिस गेज सिद्धांत के विकास (The development of Hamiltonian lattice gauge theory)

4.डीप इनेलास्टिक एलेक्ट्रोप्रोडक्शन में स्केलिंग वायोलेशन का सिद्धांत (The theory of scaling violations in deep inelastic electroproduction)

5.ब्लैक होल पूरकता के स्ट्रिंग सिद्धांत (String theory of black hole entropy)

6.कॉजल पैच परिकल्पना (The causal patch hypothesis)

7.होलोग्राफिक सिद्धांत (The holographic principle)

8.सेन्सस टेकर हैट (The Census Taker's Hat)

स्मोलिन-सस्किंड विवाद(Smolin–Susskind debate)[संपादित करें]

साल दो हजार चार में दुनिया के दो बड़े विख्यात वैज्ञानिकों के बीच विवाद हुआ। स्मोलीन और लियोनार्ड सस्किंड के बीच यह विवाद स्मोलीन के इस पे हुआ तर्क की एन्थ्रोपिक प्रिंसिपल कभी गलत नहीं हो सकता हैं और इस कारण यह विज्ञान का हिस्सा बनने योग्य नहीं है। यह विवाद २६ जुलाई २०१४ को स्मोलीन के प्रकाशन के साथ शुरू हुआ। स्मोलीन ने सस्किंड को ईमेल कर कुछ सुझाव की गुजारिश की। सस्किंड जिन्होने इस प्रकाशन को पड़ा नहीं था, स्मोलीन से प्रकाशन की व्याख्या की माँग की। स्मोलीन ने अपने तर्कों की व्याख्या सस्किंड को भेजी। २८ जुलाई २००४ को सस्किंड ने यह कह कर जबाब दिया कि स्मोलीन के तर्क हास्यास्पद निष्कर्ष दे सकते है। उसके अगले ही दिन स्मोलीन ने यह जबाब दिया की अगर हमारे सहयोगियों का एक महत्वपूण हिस्सा एक ऐसे सिध्दांत को अपनाने में नहीं हिचकिचा सकता जो गलत बी नहीं हो सकता, तब विज्ञान की प्रगति रुक जाएगी और ऐसे गलत सिध्दांत जो की कभी गलत साबित नहीं किए जा सकते, विज्ञान के ऊपर हावी हो जाएंगे। इस घटना के कुछ दिनों बाद सस्किंड ने अपने एक प्रकाशन में स्मोलीन के सिध्दांतो पर कुछ टिप्पणियाँ की। आखिर स्मोलीन सस्किंड विवाद इस समझौते में अंत हुआ की दिनों एक आखिर खत लिखेंगे जो एज (Edge) में प्रकाशित होगा जिसमे उन्हें तीन शर्तो का पालन करना होगा :-

१. कोई भी एक खत से ज्यादा नहीं लिखेगा।

२. कोई भी दूसरे के खत प्रकाशन के पहले नहीं पढ़ेगा।

३. कोई भी प्रकाशन के बाद तत्थ्यो में बदलाव नहीं करेंगे।

सन्दर्भ[संपादित करें]

ये भी देखें[संपादित करें]

  • In a review of Susskind's book The Cosmic Landscape: String Theory and the Illusion of Intelligent Design, Michael Duff writes that Susskind is "a card-carrying atheist". Life in a landscape of possibilities, December 2005. Retrieved May 30, 2007.