रोम गणतंत्र

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
रोमन गणतंत्र
सरकारी नाम (सिक्कों पर):
रोमा
लगभग १०० ईपू के बाद:
Senatus Populus Que Romanus (SPQR)
(अर्थ: रोम की सनेट व जनता)
५०९ ईसापूर्व–२७ ईसापूर्व

SPQR

जूलियस सीज़र के हत्याकांड के काल में रोम का विस्तार, ४४ ईपू
राजधानी रोम
भाषाएँ लातिनी (सरकारी),
कई अन्य ग़ैर-सरकारी भाषाएँ जैसे कि यूनानी, इब्रानी, सीरियाई, गाउली, बर्बर
धर्म रोमन पारम्परिक धर्म
शासन सम्भांतवादी गणतंत्र
कोन्सुल
 -  ५०९-५०८ ईपू लूसियस ब्रूतस,
लूसियस कोलातिनस
 -  २७ ईपू गेय्स ओक्तेवियस,
मार्कस आग्रिप्पा
विधानमंडल विधान सभा
ऐतिहासिक युग प्राचीनकाल
 -  लूक्रीसिया का बलात्कार ५०९ ईसापूर्व
 -  जूलियस सीज़र का आजीवन तानाशाह घोषित होना ४४ ईसापूर्व
 -  ऐक्टियम का युद्ध २ कतूबर ३१ ईपू
 -  ऑगस्टस कैसर का राज्याभिषेक १६ जनवरी २७ ईसापूर्व
क्षेत्रफल
 -  326 BC[1] 10,000 किमी ² (3,861 वर्ग मील)
 -  200 BC[1] 3,60,000 किमी ² (1,38,997 वर्ग मील)
 -  146 BC[1] 8,00,000 किमी ² (3,08,882 वर्ग मील)
 -  100 BC[1] 12,00,000 किमी ² (4,63,323 वर्ग मील)
 -  50 BC[1] 19,50,000 किमी ² (7,52,899 वर्ग मील)

रोम गणतंत्र (लातिनी: Res Publica Romana, रेस्पुब्लिका रोमाना; Roman Republic) प्राचीन रोमन सभ्यता के उस काल को कहा जाता है जब वहाँ की सरकार गणतांत्रिक व्यवस्था के अनुसार चलाई जाती थी। इसकी शुरुआत सन् ५०९ ईसापूर्व में रोम में राजशाही की समाप्ति के साथ हुई और यह २७ ईसापूर्व में ऑगस्टस कैसर द्वारा राजसिन्हासन पर विराजमान होने तक चली।

रोम गणतंत्र का नेतृत्व दो कोन्सुल किया करते थे जिनका चुनाव नागरिक एक वर्ष की अवधि के लिये किया करते थे। एक सेनेट नामक सभा इनके सलाहकार के रूप में काम करती थी और यह कोन्सुल उसे जवाबदेह भी थे। शक्तियों के इस बटवारे से किसी भी शासक को अधिक ताक़त समेटकर तानाशाह बनने से रोकने की चेष्टा की गई थी। धीरे-धीरे इन सिद्धांतो पर आधारित एक संविधान ने भी रूप ले लिया।

रोम गणतंत्र के काल में रोमन साम्राज्य का बहुत विस्तार हुआ। पहले यह पूरे इतालवी प्रायद्वीप पर फैल गया। फिर उत्तर अफ़्रीका, इबेरियाई प्रायद्वीप, यूनान और दक्षिणी फ़्रान्स भी इसके अधीन हो गये। पहली सदी ईसापूर्व तक पूरा फ़्रान्स और पूर्वी भूमध्य सागर से सटा हुआ लगभग सारा इलाक़ा साम्राज्य का भाग बन चुका था।[2][3]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Taagepera, Rein (1979). "Size and Duration of Empires: Growth–Decline Curves, 600 BC to 600 AD". Social Science History. Social Science History, Vol. 3, No. 3/4. 3 (3/4): 115–138 [125]. JSTOR 1170959. डीओआइ:10.2307/1170959.
  2. Gary Forsythe, A Critical History of Early Rome: From Prehistory to the First Punic War, p.368, University of California Press, 2006
  3. V. Henry T. Nguyen, Christian Identity in Corinth: A Comparative Study of 2 Corinthians, Epictetus and Valerius Maximums, p.24, Mohr Siebeck, 2008