रियांग

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रियांग, भारत की एक प्रमुख जनजाति हैं। अलग-अलग स्थानों पर इस समुदाय को ब्रू, रियांग अथवा ब्रू-रियांग नाम से संबोधित किया जाता है। रियांग समाज कट्टर वैष्णव हिन्दू है। अत्यन्त राष्ट्रवादी है, इनकी संस्कृति काफी उन्नत एवं परिष्कृत है।[1] मतान्तरण, पश्चिमीकरण तथा मीजोकरण एवं भारतवर्ष के खिलाफ चर्च प्रायोजित षड्यंत्र का ये विरोध करते हैं। इस कारण चर्च के पादरी इनके खिलाफ रहते हैं।

वर्ष 1997 में जातीय तनाव के कारण बड़ी संख्या में ब्रू परिवारों ने मिज़ोरम से भागकर त्रिपुरा में शरण ली थी। त्रिपुरा में इन परिवारों को स्थायी शिविरों में रखा गया और उस समय इनकी संख्या लगभग 30 हज़ार थी। ब्रू शरणार्थियों का मुद्दा कई वर्षों से लंबित था, जनवरी २०२० में भारत सरकार और त्रिपुरा एवं मिजोरम सरकारों के बीच इनके पुनर्वास से सम्बन्धित एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ।

निवास क्षेत्र[संपादित करें]

सन्‌ २००१ की जनगणना के अनुसार रियांग समुदाय के हिन्दुआें की संख्या ४,३८,९८० है जो असम, त्रिपुरामिजोरम में फैले हुए हैं। मिजोरम के तीन जिलों- मामित, कालाशिव और लुंग्लाई के ३०५ गांवों में ९८ हजार रियांग रहते हैं। असम के तीन जिलों- हैलाकांडी, करीमगंज तथा काछार के ५७ ग्रामों में एक लाख से अधिक रियांग रहते हैं। त्रिपुरा के तीन जिलों- उत्तर त्रिपुरा, पूर्व त्रिपुरा तथा धलाई जिलों में २ लाख ३५ हजार के लगभग रियांग रहते हैं।

ब्रू और मिज़ो समुदाय के बीच संघर्ष[संपादित करें]

ब्रू और मिज़ो समुदाय के बीच संघर्ष का पुराना इतिहास रहा है। मिज़ो समुदाय के अनुसार, ब्रू जनजाति के लोग बाहरी (विदेशी) हैं, जो उनके क्षेत्र में आकर बस गए हैं। वर्ष 1995 में मिज़ोरम राज्य में ब्रू समुदाय द्वारा स्वायत्त ज़िला परिषद की मांग और चुनावों में भागीदारी के कुछ अन्य मुद्दों पर ब्रू और मिज़ो समुदाय के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। वर्ष 1997 में दोनों समुदायों के बीच हिंसक झड़पें पुनः तेज़ हो गईं, इसी दौरान ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट (Bru National Liberation Front) के सदस्यों ने एक मिज़ो अधिकारी की हत्या कर दी। इसके बाद दोनों समुदायों के बीच दंगे भड़क गए और अल्पसंख्यक होने के कारण ब्रू समुदाय को मिज़ोरम में अपना घर-बार छोड़कर त्रिपुरा के शरणार्थी शिविरों में आश्रय लेना पड़ा। ब्रू समुदाय के लोग पिछले 23 वर्षों से उत्तरी त्रिपुरा के कंचनपुर प्रखंड में स्थायी शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं

भारत सरकार के साथ समझौता[संपादित करें]

16 जनवरी, 2020 को भारत सरकार, त्रिपुरा सरकार तथा मिज़ोरम की राज्य सरकारों व ब्रू समुदाय के प्रतिनिधियों के मध्य ब्रू शरणार्थियों से जुड़ा एक चतुर्पक्षीय समझौता हुआ। इस समझौते के अनुसार लगभग 34 हजार ब्रू शरणार्थियों को त्रिपुरा में ही बसाया जाएगा, साथ ही उन्हें सीधे सरकारी तंत्र से जोड़कर राशन, यातायात, शिक्षा आदि की सुविधा प्रदान कर उनके पुनर्वास में सहायता प्रदान की जाएगी। इस चतुर्पक्षीय समझौते से करीब 23 वर्षों से जारी एक बड़ी समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा।

इस समझौते के तहत विस्थापित ब्रू परिवारों के लिए निम्नलिखित व्यवस्था की गई है-[2]

  • वे सभी ब्रू-रियांग परिवार जो त्रिपुरा में ही बसना चाहते हैं, उनके लिये त्रिपुरा में स्थायी तौर पर रहने की व्यवस्था के साथ उन्हें त्रिपुरा राज्य के नागरिकों के सभी अधिकार दिये जाएंगे।
  • त्रिपुरा सरकार विस्थापित परिवारों के बैंक खाते, आधार कार्ड, जाति प्रमाणपत्र व निवास प्रमाणपत्र तथा मतदाता पहचान पत्र आदि जरूरी प्रमाण-पत्रों की व्यवस्था करेगी।
  • ये लोग केंद्र सरकार व त्रिपुरा राज्य की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
  • समझौते के तहत विस्थापित परिवारों को 1200 वर्ग फीट का आवासीय प्लाॅट दिया जाएगा।
  • प्रत्येक विस्थापित परिवार को घर बनाने के लिये 1.5 लाख रुपए की नकद सहायता प्रदान की जाएगी।
  • इसके साथ ही हर परिवार को 4 लाख रुपए सावधि जमा (फिक्स्ड डिपाॅजिट) के रूप दिये जाएंगे।
  • पुनर्वास सहायता के रूप में परिवारों को दो वर्षों तक प्रतिमाह 5 हजार रूपए और निःशुल्क राशन प्रदान किया जाएगा।
  • इस समझौते के तहत सभी प्रकार की नकद सहायता प्रत्यक्ष लाभ अन्तरण (Direct Benifit Transfer) प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा कराई जाएगी।
  • इस नई योजना के लिये भूमि की व्यवस्था त्रिपुरा सरकार द्वारा की जाएगी।
  • नए समझौते के तहत योजना के लिये केंद्र सरकार द्वारा 600 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

इस समझौते की सभी ओर से बहुत प्रशंसा की जा रही है।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]