राजनारायण बसु

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राजनारायण बसु

राजनारायण बसु (1826 – 1899) बांग्ला लेखक एवं बंगाली पुनर्जागरण के चिन्तक थे। उनका जन्म २४ परगना स्थित बोरल में हुआ था।

उल्लेखनीय कृतियाँ[संपादित करें]

राजनारायण बसु ने कठोपनिषद, केनोपनिषद, मुण्डकोपनिषद तथा श्वेताश्वेतर उपनिषद उपनिषदों का अंग्रेजी में अनुवाद किया। उनके कुछ उल्लेखनीय ग्रन्थ हैं:

  • राजनारायण बसुर बक्तृता (प्रथम भाग-१८५५, द्वितीय भाग-१८७०)
  • ब्राह्म साधन (१८६५)
  • धर्मतत्त्बदीपिका (प्रथम भाग-१८६६, द्वितीय भाग-१८६७)
  • आत्मीय सभार सदस्यदेर बृत्तान्त (१८६७)
  • हिन्दु धर्मेर श्रेष्ठता (१८७३)
  • सेकाल आर एकाल (१८७४)
  • ब्राह्मधर्मेर उच्च आदर्श ओ आमादिगेर आध्यात्मिक अभाव (१८७५)
  • हिन्दु अथबा प्रेसिडेन्सि कलेजेर इतिबृत्त (१८७६)
  • बांला भाषा ओ साहित्य बिषय़क बक्तृता (१८७८)
  • बिबिध प्रबन्ध (प्रथम खन्ड-१८८२)
  • ताम्बुलोप हार (१८८६)
  • सारधर्म (१८८६)
  • बृद्ध हिन्दुर आशा (१८८७)
  • राजनाराय़ण बसुर आत्मचरित (१९०९)