यादृच्छित नियंत्रित परीक्षण

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
दो समूहों के समानांतर यादृच्छिक परीक्षण के चरणों (नामांकन, आवंटन, हस्तक्षेप, अनुवर्ती, और डेटा विश्लेषण) का फ़्लोचार्ट, CONSORT (Consolidated Standards of Reporting Trials) 2010 Statement समेकित मानकों) से संशोधित।[1]

एक यादृच्छित नियंत्रित परीक्षण (अंग्रेज़ी- randomized controlled trial, randomized control trial;[2] RCT) एक प्रकार का वैज्ञानिक (प्रायः चिकित्सा) प्रयोग है जिसका उद्देश्य नए उपचारों की प्रभावशीलता का परीक्षण करते समय पूर्वाग्रह के कुछ स्रोतों को कम करना है। ऐसा यह दो या दो से अधिक समूहों को यादृच्छिक ढंग से आवंटित करके, उनके साथ अलग-अलग व्यवहार करके, और फिर एक मापी हुई प्रतिक्रिया के संबंध में उनकी तुलना करके सुनिश्चित किया जाता है।

एक समूह (प्रायोगिक समूह) के हस्तक्षेप का आकलन किया जा रहा होता है, जबकि दूसरा समूह (नियंत्रण समूह) किसी वैकल्पिक स्थिति में होता है, जैसे कि प्लेसीबो या बिना किसी हस्तक्षेप के। प्रयोगात्मक डिज़ाइन कितना प्रभावी था यह देखने के लिए परीक्षण डिज़ाइन की शर्तों के तहत समूहों का अवलोकन किया जाता है। [3] नियंत्रण की तुलना में उपचार प्रभावकारिता का आकलन किया जाता है। एक से अधिक उपचार समूह या एक से अधिक नियंत्रण समूह भी हो सकते हैं।

ऐसे केस, जहाँ जानकारी जो प्रतिभागियों को प्रभावित कर सकती है, वहाँ अंधा परीक्षण भी किया जा सकता है। यहाँ परीक्षण में भाग लेने वालों को जानकारी प्रयोग पूरा होने के बाद ही दी जाती है। एक प्रयोग के किसी भी प्रतिभागी का एक अंधा परीक्षण किया जा सकता है, जिसमें सबजेक्ट (जिनपर परीक्षण किया जा रहा है), शोधकर्ता, तकनीशियन, डेटा विश्लेषक और मूल्यांकनकर्ता शामिल हैं। अच्छा अंधा प्रयोगात्मक पूर्वाग्रह के कुछ स्रोतों को कम या समाप्त कर सकता है। इससे नतीजे तटस्थ आने की सम्भावना बढ़ जाती है।

समूहों को सबजेक्ट्स के असाइनमेंट में यादृच्छिकता चयन पूर्वाग्रह और आवंटन पूर्वाग्रह को कम करती है, साथ ही उपचार के असाइनमेंट में ज्ञात और अज्ञात दोनों रोगप्रतिकारक कारकों को संतुलित करती है। [4]अंधाकरण प्रयोगकर्ता और विषय पक्षपात के अन्य रूपों को कम करता है।

एक अच्छी तरह से अंधीकृत आरसीटी को अक्सर नैदानिक परीक्षणों के लिए सोने का मानक (gold standard) माना जाता है। ब्लाइंडेड आरसीटी आमतौर पर चिकित्सा हस्तक्षेप की प्रभावकारिता का परीक्षण करने के लिए उपयोग किया जाता है और इसके अतिरिक्त दवा के प्रतिक्रियाओं जैसे प्रतिकूल प्रभाव के बारे में जानकारी प्रदान कर सकता है।

"आरसीटी" और " यादृच्छिक परीक्षण" (randomized trial) शब्द कभी-कभी समानार्थी रूप से उपयोग किए जाते हैं, लेकिन बाद वाला शब्द नियंत्रणों का उल्लेख करता है और इसलिए उन अध्ययनों का वर्णन कर सकता है जो नियंत्रण समूह की अनुपस्थिति में एक दूसरे के साथ कई उपचार समूहों की तुलना करते हैं।[5] इसी तरह, प्रारंभिकवाद को कभी-कभी " यादृच्छिक नैदानिक परीक्षण" (randomized clinical trial) या " यादृच्छिक तुलनात्मक परीक्षण" (randomized comparative trial) के रूप में विस्तारित किया जाता है, जिससे वैज्ञानिक साहित्य में अस्पष्टता आ जाती है[6][7]सभी यादृच्छिक नैदानिक परीक्षण यादृच्छिक नियंत्रितपरीक्षण नहीं हैं (और उनमें से कुछ कभी नहीं हो सकते हैं, जैसे कि उन मामलों में जहां नियंत्रण अव्यवहारिक या संस्थान के लिए अनैतिक होगा)। यादृच्छिक नियंत्रित नैदानिक परीक्षण (randomized controlled clinical trial) शब्द एक वैकल्पिक शब्द है जिसका उपयोग नैदानिक अनुसंधान में किया जाता है; [8] हालांकि, आरसीटी अन्य सामाजिक क्षेत्रों में भी कार्यरत हैं, जिनमें से कई सामाजिक विज्ञान भी शामिल हैं।

२०१९ का अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार अभिजीत बनर्जी, एस्थर डुफ्लो और माइकल क्रेमर को यादृच्छिक नियंत्रण परीक्षण का अर्थशास्त्र अनुसंधान में प्रयोग करने के लिए ही दिया गया था।[9][10][11]

यह भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Schulz KF, Altman DG, ((Moher D; for the CONSORT Group)) (2010). "CONSORT 2010 Statement: updated guidelines for reporting parallel group randomised trials". Br Med J. 340: c332. PMC 2844940. PMID 20332509. डीओआइ:10.1136/bmj.c332.सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)
  2. Chalmers TC, Smith H Jr, Blackburn B, Silverman B, Schroeder B, Reitman D, Ambroz A (1981). "A method for assessing the quality of a randomized control trial". Controlled Clinical Trials. 2 (1): 31–49. PMID 7261638. डीओआइ:10.1016/0197-2456(81)90056-8.
  3. "Randomised controlled trial". National Institute for Health and Care Excellence, London, UK. 2019. मूल से 24 सितंबर 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 June 2019.
  4. Moher D, Hopewell S, Schulz KF, Montori V, Gøtzsche PC, Devereaux PJ, Elbourne D, Egger M, Altman DG (2010). "CONSORT 2010 explanation and elaboration: updated guidelines for reporting parallel group randomised trials". Br Med J. 340: c869. PMC 2844943. PMID 20332511. डीओआइ:10.1136/bmj.c869.
  5. Ranjith G (2005). "Interferon-α-induced depression: when a randomized trial is not a randomized controlled trial". Psychother Psychosom. 74 (6): 387, author reply 387–8. PMID 16244516. डीओआइ:10.1159/000087787.
  6. Peto R, Pike MC, Armitage P, Breslow NE, Cox DR, Howard SV, Mantel N, McPherson K, Peto J, Smith PG (1976). "Design and analysis of randomized clinical trials requiring prolonged observation of each patient. I. Introduction and design". Br J Cancer. 34 (6): 585–612. PMC 2025229. PMID 795448. डीओआइ:10.1038/bjc.1976.220.
  7. Peto R, Pike MC, Armitage P, Breslow NE, Cox DR, Howard SV, Mantel N, McPherson K, Peto J, Smith PG (1977). "Design and analysis of randomized clinical trials requiring prolonged observation of each patient. II. Analysis and examples". Br J Cancer. 35 (1): 1–39. PMC 2025310. PMID 831755. डीओआइ:10.1038/bjc.1977.1.
  8. Wollert KC, Meyer GP, Lotz J, Ringes-Lichtenberg S, Lippolt P, Breidenbach C, Fichtner S, Korte T, Hornig B, Messinger D, Arseniev L, Hertenstein B, Ganser A, Drexler H (2004). "Intracoronary autologous bone-marrow cell transfer after myocardial infarction: the BOOST randomised controlled clinical trial". Lancet. 364 (9429): 141–8. PMID 15246726. डीओआइ:10.1016/S0140-6736(04)16626-9.
  9. "Abhijit Banerjee, Esther Duflo and Michael Kremer win Nobel in Economics". The Economic Times. 14 October 2019. मूल से 15 अक्तूबर 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 14 October 2019.
  10. "Mumbai-born Abhijit Banerjee wins Economics Nobel, over 5 mn Indian kids benefited from his study". The Statesman. 14 October 2019. मूल से 15 अक्तूबर 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 14 October 2019.
  11. "Nobel Prize in economics awarded to trio for work on poverty. One is the youngest winner ever". Hanna Ziady. CNN. 14 October 2019. मूल से 14 अक्तूबर 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 14 October 2019.

आगे की पढाई[संपादित करें]

  • Berger, M. P. F.; Wong, W. K. (2009). An Introduction to Optimal Designs for Social and Biomedical Research. John Wiley & Sons. पृ॰ 346. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-470-69450-3.
  • Bhargava Alok (2008). "Randomized controlled experiments in health and social sciences: Some conceptual issues". Economics and Human Biology. 6 (2): 293–298. PMID 18325858. डीओआइ:10.1016/j.ehb.2008.01.001.
  • Domanski MJ, McKinlay S. Successful randomized trials: a handbook for the 21st century. Philadelphia: Lippincott Williams & Wilkins, 2009. ISBN 978-0-7817-7945-6.
  • Jadad AR, Enkin M. Randomized controlled trials: questions, answers, and musings. 2nd ed. Malden, Mass.: Blackwell, 2007. ISBN 978-1-4051-3266-4.
  • Matthews JNS. Introduction to randomized controlled clinical trials. 2nd ed. Boca Raton, Fla.: CRC Press, 2006. ISBN 1-58488-624-2.
  • Nezu AM, Nezu CM. Evidence-based outcome research: a practical guide to conducting randomized controlled trials for psychosocial interventions. Oxford: Oxford University Press, 2008. ISBN 978-0-19-530463-3.
  • Solomon PL, Cavanaugh MM, Draine J. Randomized controlled trials: design and implementation for community-based psychosocial interventions. New York: Oxford University Press, 2009. ISBN 978-0-19-533319-0.
  • Torgerson DJ, Torgerson C. Designing randomised trials in health, education and the social sciences: an introduction. Basingstoke, England, and New York: Palgrave Macmillan, 2008. ISBN 978-0-230-53735-4.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]