एस्थर डुफ्लो

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एस्थर डुफ्लो

2009 में एस्थर डुफ्लो
जन्म 25 अक्टूबर 1972 (1972-10-25) (आयु 48)
पेरिस, फ़्रान्स
राष्ट्रीयता फ़्रांसीसी, अमेरिकी[1]
क्षेत्र सामाजिक अर्थशास्त्र
वैकासिक अर्थशास्त्र
संस्थान मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी
डॉक्टरी सलाहकार अभिजीत बनर्जी[2]
Joshua Angrist[2]
डॉक्टरी शिष्य Dean Karlan[3]
उल्लेखनीय सम्मान John Bates Clark Medal (2010)
Calvó-Armengol International Prize (2010)
Dan David Prize (2013)
Nobel Prize in Economics (2019)

एस्थर डुफ्लो, एफबीए ( French: [dyflo] ; जन्म 25 अक्टूबर 1972) एक फ्रांसीसी-अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं,[4] जो मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में गरीबी उन्मूलन और विकास अर्थशास्त्र की प्रोफेसर हैं। वे अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब के सह-संस्थापक और सह-निदेशक हैं। उनका शोध घरेलू व्यवहार, शिक्षा, वित्त तक पहुंच, स्वास्थ्य और नीति मूल्यांकन सहित विकासशील देशों में सूक्ष्म आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित है।

2019 में वे अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार की आज तक की सबसे कम उम्र की विजेता बन गईं। साथ ही, वे दूसरी महिला हैं जिन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला है। इसे उन्होंने अभिजीत बनर्जी (उनके पति) और माइकल क्रेमर के साथ साझा किया। यह पुरस्कार देने के पीछे नोबेल समिति का तर्क था कि उन्होंने "ऐसे शोध किए जो वैश्विक ग़रीबी से लड़ने की हमारी क्षमता में काफ़ी सुधार करते है"।[5]  इसके लिए वे यादृच्छिक नियंत्रण परीक्षण तकनीक का प्रयोग अर्थशास्त्र-सम्बंधी समस्याओं को समझने के लिए करने के लिए जानी जाती हैं।[6]

पुरस्कार[संपादित करें]

अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार[संपादित करें]

एस्थर डुफ्लो को 2019 में अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया, साथ ही उनके दो सह-शोधकर्ताओं अभिजीत बनर्जी और माइकल क्रेमर को "वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए उनके प्रयोगात्मक दृष्टिकोण" के लिए सम्मानित किया गया। डफ़्लो इस पुरस्कार को जीतने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति और दूसरी महिला हैं। [7]

रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेजसे प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है: "उनके प्रयोगात्मक अनुसंधान के तरीके अब पूरी तरह से विकास अर्थशास्त्रपर हावी हैं।" [8][9]

नोबेल समिति ने टिप्पणी की:

"बनर्जी, डुफ्लो और उनके सह-लेखकों ने निष्कर्ष निकाला कि छात्र स्कूल में अतिरिक्त दिनों से कुछ भी नहीं सीखते हैं। पाठ्यपुस्तकों पर खर्च करने से भी सीखने को बढ़ावा नहीं मिलता है, इसके बावजूद कि कीनिया के स्कूलों में आवश्यक सामग्री का अभाव था। इसके अलावा, भारतीय संदर्भ में बनर्जी और डुफ्लो ने क्षेत्र परीक्षण के परिणाम ने पाया कि बहुत से बच्चे बहुत कम सीख पाते हैं: वडोदरा शहर में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले पाँच में से एक से भी कम छात्र क्षेत्र पहली कक्षा के पाठ्यक्रम के गणित परीक्षा के प्रश्नों का सही उत्तर दे पा रहे थे। [10]

"इस तरह के निष्कर्षों के जवाब में, बैनर्जी, डुफ्लो और सह-लेखकों ने तर्क दिया कि स्कूल में अधिक बच्चों को लाने के प्रयासों के साथ-साथ स्कूल की गुणवत्ता में सुधार पर भी ज़ोर दिया जाना चाहिए।" [11] रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज को टेलीफोन द्वारा जवाब देते हुए, डुफ्लो ने बताया कि उन्हें "एक अत्यंत उपयुक्त और महत्वपूर्ण समय पर" यह पुरस्कार मिला है और उम्मीद है कि यह "और भी बहुत-सारी महिलाओं को काम जारी रखने के लिए प्रेरित करेगा और कई अन्य पुरुषों को उन्हें वह सम्मान देने के लिए प्रेरित करेगा, जो हर मनुष्य को मिलना चाहिए।" [12]

ये सभी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "Esther Duflo CV". मूल से 27 अप्रैल 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 अक्तूबर 2019.
  2. Duflo, Esther (1999), Essays in empirical development economics Archived 10 अक्टूबर 2016 at the वेबैक मशीन.. Ph.D. dissertation, Massachusetts Institute of Technology.
  3. Karlan, Dean S. (2002), Social capital and microfinance Archived 14 अक्टूबर 2019 at the वेबैक मशीन.. Ph.D. dissertation, Massachusetts Institute of Technology.
  4. "Esther Duflo Short Bio and CV". मूल से 27 अप्रैल 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 अक्तूबर 2019.
  5. "अभिजीत बनर्जी: नोबेल पुरस्कार विजेता को जानते हैं आप?"".
  6. "Economics of poverty: On Economic Sciences' Nobel". The Hindu (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 21 October 2019.
  7. Johnson, Simon; Pollard, Niklas (October 14, 2019). "Trio wins economics Nobel for science-based poverty fight". Reuters. मूल से 14 अक्तूबर 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 अक्तूबर 2019.
  8. "The Prize in Economic Sciences 2019" (PDF). Royal Swedish Academy of Sciences: Nobel prize. 14 October 2019. मूल से 14 अक्तूबर 2019 को पुरालेखित (PDF). अभिगमन तिथि 14 October 2019.
  9. "Nobel Prize in Economics won by Banerjee, Duflo and Kremer for fighting poverty". The Guardian. 14 October 2019. मूल से 15 अक्तूबर 2019 को पुरालेखित.
  10. "Nobel Prize in Economics won by Banerjee, Duflo and Kremer for fighting poverty". The Guardian. 14 October 2019. मूल से 15 अक्तूबर 2019 को पुरालेखित.
  11. "Nobel Prize in Economics won by Banerjee, Duflo and Kremer for fighting poverty". The Guardian. 14 October 2019. मूल से 15 अक्तूबर 2019 को पुरालेखित.
  12. "The Latest: Duflo 'humbled' to win economics Nobel Prize". Times Colonist: The Associated Press. 14 October 2019. मूल से 14 अक्तूबर 2019 को पुरालेखित.

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बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]