मिश्र

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मिश्र ब्राह्मणों में आस्पद या उपनाम है। सब गुणों और कर्मों में निपुण तथा सबमें मिले रहने के कारण[कृपया उद्धरण जोड़ें] इस उप नाम को अंगीकृत किया गया।

मिश्रों के गोत्र[संपादित करें]

मिश्र उपनाम के ब्राह्मणों में निम्न गोत्र होते हैं :

वत्स गोत्र[संपादित करें]

वत्स मिश्रा का गोत्र है वत्स का अर्थ बछडा पुत्र शिष्य आदि होता है

कात्यायन[संपादित करें]

कात्यायन गोत्रीय ब्राह्मणों की गिनती षटकुलों में होती है। षटकुलों में कात्यायन, उपमन्यु, भरद्वाज, कश्यप, शांडिल्य और सांकृत आते हैं। इन गोत्रों के ब्राह्मण कुलीन कहलाते हैं। बैजेगांव, सुठियाएं, माँझगाँव, आंकिन, ग्वालमैदान, बदरका के ब्राह्मण श्रेष्ठ कात्यायन गोत्रीय मिश्र हैं।जैसे प्रताप नारायण मिश्र ( हिंदी निबंध लेखक ) बैजेगांव के मिश्र।

कश्यप[संपादित करें]

कश्यप गोत्रीय मिश्रों में लक्ष्मण, नगरा, शाहाबाद आदि हैं।

उपमन्यु[संपादित करें]

इस गोत्र में शिवदत्त मीराँव, सहतावन केशरीमऊ, बृन्दावन ललपुरा आदि के ब्राह्मण आते हैं।

सांकृत[संपादित करें]

इस गोत्र के अंतर्गत वीर जाजमऊ, बनवारी चचेंड़ा, प्रजापति इटावा तथा कृष्णी कौशिकपुर के कान्यकुब्ज ब्राह्मण आते हैं।

काशयव[संपादित करें]

इस गौत्र के अंतर्गत मिथिला बाहमण आते है। इस गौत्र के लोगो का उपनाम मिश्रा होता है।ये बाह्यण बिहार के मधुबनी जिले, दरभंगा,बेनीपटी,रैइका आदि आसपास के क्षेत्रो मे रहते है।

उल्लेखनीय लोग[संपादित करें]

कवि एवं लेखक[संपादित करें]

नरई संग्रामगढ प्रतापगढ

न्यायाधीश वर्ग[संपादित करें]

राजनीतिज्ञ[संपादित करें]

साहित्य[संपादित करें]

खेल-कूद[संपादित करें]

सरकारी अधिकारी[संपादित करें]


अन्य उल्लेखनीय व्यक्तित्व[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. http://supremecourtofindia.nic.in/judges/sjud/dipakmisra.htm
  2. Tribhuvan of Nepal#Congress Rana Government

श्रेणी:भारतीय ब्राह्मण