मिरैन्डा (उपग्रह)

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मिरैन्डा की सतह बहुत ही ऊबड़-खाबड़ है

मिरैन्डा अरुण (युरेनस) ग्रह के पांच गोल अकार वाले बड़े प्राकृतिक उपग्रहों में से सब से छोटा और अरुण की सब से क़रीबी परिक्रमा करते हुआ उपग्रह है। ध्यान रहे के इस से छोटे अरुण के इर्द-गिर्द २० से अधिक अन्य उपग्रह भी हैं, लेकिन वे गोल की बजाए बेढंगे अकार के हैं। इसकी खोज १६ फ़रवरी १९४८ में जॅरार्ड काइपर ने दूरबीन से की थी। मिरैंडा की पास से तस्वीरें केवल वॉयेजर द्वितीय यान के जनवरी १९८६ में अरुण के पास से गुज़रने पर लीं गयी थीं। मिरैंडा की सतह देखने में ऊबड़-खाबड़ लगती है और वैज्ञानिकों का मानना है के वह अधिकतर जमे हुए पानी की बर्फ़ की बनी हुई है। यह भी सोच है के मिरैंडा के अन्दर पत्थर भी मौजूद हैं। इस चन्द्रमा की गहरी खाइयों को देखकर लगता है के अतीत में इसपर बहुत भूकंप आते थे जिस वजह से इसकी ज़मीन इतनी टूटी और टेढ़ी-मेढ़ी है।

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