मणिलाल द्विवेदी

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मणिलाल द्विवेदी

मणिलाल नभुभाई द्विवेदी (26 सितंबर 1858 - 1 अक्टूबर 1898) गुजराती भाषा के लेखक, कवि, उपन्यासकार, निबंधकार, दार्शनिक और समाज सुधारक थे। उन्होंने 19वीं सदी के गुजराती साहित्य को बहुत प्रभावित किया और इस क्षेत्र में मान्यता प्राप्त बॉम्बे विश्वविद्यालय के पहले स्नातक थे। अर्वाचीन गुजराती साहित्य के संस्थापक नर्मद, मणिलाल को अपना बौद्धिक उत्तराधिकारी मानते थे।

मणिलाल पंडित युग से ताल्लुक रखते हैं, जो गुजराती साहित्य का युग है। इसके दौरान विद्वतापूर्ण लेखन विकसित हुआ। शंकर के अद्वैत दर्शन में उनकी आस्था उनके दार्शनिक विचारों का मूल आधार था।

जीवन[संपादित करें]

मणिलाल का जन्म 26 सितंबर 1858 को गुजरात के नाडियाड में एक शतोदरा नागर परिवार में हुआ था। उनके दादा भाईलाल दवे पुलिस उप-निरीक्षक थे। मणिलाल के साहूकार और मंदिर के पुजारी पिता नभुभाई को अपने पिता से 11,000 रुपये और घर मिला।[1] 1880 में उन्होंने इतिहास और राजनीति में स्नातक किया। उनका अपने पिता से कोई काम करने का दवाब था। उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी लेकिन स्वयंपाठी के रूप में एमए की पढ़ाई पूरी की।

गुजराती लेखक गोवर्धनराम माधवराम त्रिपाठी के साथ मणिलाल ने गुजराती साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया।[2] उन दोनों की गतिविधि की अवधि (1885-1905) को पंडित युग जैसे सामान्य शब्दों के बजाय मणि-गोवर्धन युग के रूप में मान्यता प्राप्त है। मणिलाल गुजराती साहित्य में विशिष्ट स्थान रखते हैं। उन्होंने पश्चिमी संस्कृति के लिए अपने साथी भारतीयों के अंधे उत्साह का विरोध किया। उसका प्रतिकार करने के लिए उन्होंने अपनी विचारों को प्रचारित करने का प्रयास किया।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Thaker, Dhirubhai (1983). Manilal Dwivedi. Makers of Indian Literature. New Delhi: Sahitya Akademi. पपृ॰ 14–16, 35–36. OCLC 10532609.
  2. Thaker 1983, पृ॰ 54.