भौतिकवाद

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भौतिकवाद (अंग्रेज़ी: Materialism) दार्शनिक एकत्ववाद का एक प्रकार हैं, जिसका यह मत है कि प्रकृति में पदार्थ ही मूल द्रव्य है, और साथ ही, सभी दृग्विषय, जिस में मानसिक दृग्विषय और चेतना भी शामिल हैं, भौतिक परस्पर संक्रिया के परिणाम हैं।

भौतिकवाद का भौतिकतावाद (अंग्रेज़ी: Physicalism) से गहरा सम्बन्ध हैं, जिसका यह मत है कि जो कुछ भी अस्तित्व में हैं, वह अंततः भौतिक हैं। भौतिक विज्ञानों की ख़ोज के साथ, दार्शनिक भौतिकतावाद भौतिकवाद से क्रम-विकासित हुआ, ताकि सिर्फ़ सामान्य पदार्थ के बजाए भौतिकता के अधिक परिष्कृत विचारों को समाहित किया जा सकें, जैसे कि, दिक्-काल, भौतिक ऊर्जाएँ और बल, डार्क मैटर, इत्यादि। अतः, कुछ लोग "भौतिकवाद" से बढ़कर "भौतिकतावाद" शब्द को वरीयता देते हैं, जबकि कुछ इन शब्दों का प्रयोग समानार्थी शब्दों के रूप में करते हैं।

भौतिकवाद या भौतिकतावाद से विरुद्ध दर्शनों में आदर्शवाद, बहुलवाद, द्वैतवाद और एकत्ववाद के कुछ प्रकार सम्मिलित हैं।

अवलोकन[संपादित करें]

इतिहास[संपादित करें]

अक्षीय युग[संपादित करें]

आम युग[संपादित करें]

आधुनिक युग[संपादित करें]

नव भौतिकवाद[संपादित करें]

वैज्ञानिक भौतिकवादी[संपादित करें]

पदार्थ की परिभाषा[संपादित करें]

भौतिकतावाद[संपादित करें]

आलोचनाएँ और विकल्प[संपादित करें]

वैज्ञानिक आपत्तियाँ[संपादित करें]

धार्मिक और आध्यात्मिक मत[संपादित करें]

दार्शनिक आपत्तियाँ[संपादित करें]

आदर्शवाद[संपादित करें]

प्रणाली के रूप में भौतिकवाद[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]