भारतीय ताम्रलेख

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सोहगौरा ताम्रलेख ईसापूर्व तीसरी शताब्दी का है। यह अपने तरह का सबसे प्राचीन लेख है।

भारतीय ताम्रलेख, भारतीय इतिहास के तथ्यपरक लेखन की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनसे भारतीय इतिहास के पुनर्निर्माण में सहायता मिलती है। इनके अभाव में इतिहासकार उन वस्तुओं को इतिहास-लेखन का आधार बनाने के लिए विवश थे जिनके संदिग्ध होने की अधिक सम्भावना होती है (जैसे, कुछ साम्प्रदायिक/धार्मिक ग्रन्थ जिनके मूल भी अज्ञात या संदिग्ध थे ; या विदेशी यात्रियों के यात्रा-वृतान्त) । प्राप्त भारतीय ताम्रलेखों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है जिनसे भारतीय इतिहास के भूले-बिसरे पन्ने खुलने में मदद मिली है।


सन्दर्भ[संपादित करें]