भामाशाह योजना

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राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने महिलाओं को भामाशाह कार्ड वितरित करते हुए।

भामाशाह योजना राजस्थान सरकार की महिला वित्तीय सशक्तीकरण की सबसे बड़ी योजना है। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे सिंधिया ने 15 अगस्त, 2014 को मेवाड़ अंचल के उदयपुर शहर से इस योजना का शुभारंभ किया। यह ड्रीम प्रोजेक्ट देश की आजादी के पावन दिवस पर प्रदेश की करीब डेढ़ करोड़ महिलाओं के लिये 'वित्तीय आजादी' का उपहार है, जो उन्हें आर्थिक रूप से परिवार पर निर्भर रहने की मजबूरी से मुक्त करेगा। इसके माध्यम से भाजपा सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभ, इन्हीं बैंक खातों में जमा होंगे। यह योजना प्रदेश की नारी शक्ति को एकता के सूत्र में बांधकर आर्थिक अधिकार देने का प्रयास भी है।

इतिहास[संपादित करें]

राज्य सरकार ने 2008 में भामाशाह योजना प्रारंभ की थी इसके मुख्य उद्देश्य निम्न थे वित्तीय समावेशन यानि कि यह सुनिश्चित करना कि प्रदेश के सभी परिवारों के नाम बैंक खाता हो और उपरोक्त बैंक खाते महिलाओं के नाम से हो जिससे कि महिलाएं ही यह तय कर सकेगी परिवार के लिए खर्च किन चीजों के लिए आवश्यक है तथा सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ सीधे ही इन बैंक खाते में जमा कराया जाए ताकि लाभार्थी को लाभ सीधा एवं शीघ्र मिले परंतु 2009 से आगे इस योजना की क्रियान्विति नहीं की गई राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि भामाशाह योजना का क्रियान्वयन पुणे हाथ में लिया जाए तथा इस योजना में आवश्यक बदलाव कर इसे अधिक बढ़ एवं विस्तृत रूप में लागू किया जाए राज सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत नकद एवं गैर नकद सेवाओं के पारदर्शी एवं वितरण हेतु राज्य में विद्यमान तकनीकी तथा इलेक्ट्रॉनिक ढांचे (भामाशाह प्लेटफार्म) का विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण किया जाएगा इस कार्यक्रम की सफलता हेतु त्रुटिरहित समंको की नितांत आवश्यकता है भामाशाह योजना के माध्यम से राज्य में चल रही विभिन्न सेवाओं के लाभ प्राप्त करने हेतु प्रत्येक लाभार्थी को कोर बैंकिंग की सुविधा युक्त किसी भी बैंक में आधार पहचान संख्या से जोड़ा खाता खोलना आवश्यक होगा पारिवारिक लाभ को आवश्यक रूप से परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते में हस्तांतरित किया जाएगा |[1]

इस योजना की परिकल्पना भी उनके पिछले शासनकाल में बहनों को 'पावर वूमन' बनाने के उद्देश्य से ही की गई थी, लेकिन सरकार बदलने के साथ ही इस योजना को बंद कर दिया गया। जबकि उस वक्त भाजपा सरकार ने इस योजना में 45 लाख 78 हजार महिलाओं का नामांकन कर, महिलाओं के 29 लाख 7 हजार बैंक खाते खुलवाकर, 160 करोड़ रुपये बैंकों में जमा करा दिये थे। करीब 8 हजार कार्ड भी वितरित कर दिये गये थे। राजस्थान में जिन लोगों ने महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने वाली इस योजना को बंद किया था, केन्द्र में उन्हीं की यूपीए सरकार ने हमारी इस योजना की नकल कर आधार कार्ड योजना शुरू की, जो कारगर नहीं हो सकी। योजना का आधार कार्ड केवल परिचय पत्र बनकर रह गया, जिसमें न तो वित्तीय समावेश था और न ही इसकी कोई बड़ी उपयोगिता।

काफी सोच विचार के बाद हमने इस योजना को स्वतंत्रता दिवस पर मेवाड़ की पवित्र धरा से शुरू करने का निर्णय लिया, ताकि आजादी की सालगिरह के दिन को महिला स्वाभिमान दिवस के रूप में भी मनाया जाता रहे। मेवाड़ से यह योजना इसलिये लाॅन्च की गई, क्योंकि यहां पन्नाधाय, हाडी रानी और रानी पद्मिनी जैसी वीरांगनाओं ने नारी जाति का मस्तक गर्व से ऊंचा किया है।

राजस्थान जनकल्याण एवं राजकीय सेवाओं के लाभ के प्रभावी वितरण की योजना( भामाशाह योजना ) भामाशाह योजना में प्रदेश में निवास कर रहे परिवारों का पूर्ण रूप से त्रुटि रहित डाटा एकत्रित किया जाएगा जिसके अन्तर्गत राशन कार्ड, आधार कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, खाद्य सुरक्षा, बी.पी.एल. इत्यादि को सम्मलित कर इन योजनाओं के सभी लाभ भामाशाह कार्ड के माध्यम से दिये जायेंगें ताकि अलग-अलग विभागों और स्कीमों हेतु अलग-अलग कार्ड की आवश्यकता नहीं रहेगी। इस योजना के माध्यम से राज्य के सभी परिवारों एवं परिवार के समस्त सदस्य किसी भी आयु के हो का समग्र डाटाबेस तैयार किया जायेगा। विभिन्न सरकारी योजनाओं में व्यक्तिगत और परिवार से सम्बन्धित डाटा की आवश्यकता होती है। इस योजना के अन्तर्गत ‘‘आधार‘‘ नामांकन हेतु आवश्यक सूचना के अतिरिक्त परिवार एवं परिवार के सदस्यों की विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत पात्रता निर्धारित करने हेतु अन्य सूचना यथा वैवाहिक स्थिति, परिवार की श्रेणी, व्यवसाय, आय, पहचान सत्यापन दस्तावेज आदि का भी संग्रहण किया जायेगा।

9999-ITGU-00003[संपादित करें]

राजस्थान सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण एवं राज्य के निवासियों को कोर बैंकिंग की सुविधाओं से जोड़ने के लिए 15 अगस्त 2014 से भामाशाह योजना शुरु की गई इस योजना के द्वारा नकद व गैर नकद लाभ हस्तांतरण भामाशाह प्लेटफोर्म के माध्यम से आम जन को प्रदान किया जाएगा | योजना में परिवार का मुखिया महिला को बनाया गया है और परिवार के सभी सदस्यों के खाते उन्हीं के नाम पर खोले जा रहे हैं भामाशाह योजना से जुड़ने के लिए राज्य  के निवासियों को सबसे पहले भामाशाह नामांकन करवाना होगा।

भामाशाह नामांकन दो मुख्य तरीके से होता है

पहले ऑफलाइन नामांकन इसमें सरकार द्वारा ग्राम पंचायत एवं शहरों में वार्ड स्तर पर  पर शिविरों का आयोजन किया गया था दूसरा तरीका है ऑनलाइन भामाशाह नामांकन जोकि भामाशाह पोर्टल एवं ईमित्र सेवा केंद्र के द्वारा उपलव्ध कराया जा रहा है

इसके अलावा राज्य  सरकार द्वारा ग्राम पंचायत पर खोले गए अटल सेवा केन्द्रों पर ई मित्रो के द्वारा भामाशाह नामांकन निशुल्क किया जा रहा आम जन जिसे भामाशाह नामांकन कराना है वह इन ई मित्र केंद्र पर जाता है अपने अपने परिवार का नाम, पता, आधार कार्ड, विभिन्न सरकारी योजनाओं की पात्रता दर्ज किया जाता है इसके अलावा बैंक खाता की जानकारी राशन कार्ड की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है। ई मित्र संचालक इन सूचनाओं का भामाशाह के सॉफ्टवेर में अंकित करता है  और ईमित्र संचालक द्वारा संबंद्धित परिवार को भामाशाह नामांकन की रसीद उपलव्ध करा दी जाती है।

नागरिको के द्वार दर्ज सुचना वाले फार्म का सत्यापन ग्राम सचिव या पटवारी  दारा प्रथम स्तरीय सत्यापन किया जाता है। दितीय स्तर का ऑनलाइन सत्यापन तहसीलदार  द्वारा किया जाता है।

भामाशाह पोर्टल पर नागरिक स्वयं भी अपना नामांकन कर सकते हैं। लेकिन सब का सत्यापन तहसीलदार के द्वारा ही किया जाता है इसके पश्चात तकनिकी दल द्वारा अंकित किये गए डाटा की जांच की जाता है जो यह जाँचती है कि नामांकन में कोई त्रुटि तो नहीं  और कोई डाटा डुप्लीकेट तो नहीं है इस तरह गारवेज डाटा को हटा दिया जाता है इसके पश्चात सम्बंधित परिवार की फॅमिली आई डी जारी हो जाता है। इसके पश्चात  भामाशाह कार्ड प्रिंट होने चला जाता है जिसे संवंधित नागरिक तक पहुचने की जिम्मेदारी विकास अधिकारी और उपखंड अधिकारी की होती | इस तरह भामाशाह डाटा नागरिकों का एक एकीकृत डाटा बेस है इसके द्वारा ही आम जन को दिए जाने वाले लाभों को दिया जायेगा|  

भामाशाह सीडिंग[संपादित करें]

भामाशाह डाटा हब राज्य के निवासियों का केंद्रीय डेटाबेस है जिसमें राज्य के विभिन्न योजनाओं के पात्र नागरिकों को लाभ भामाशाह  के माध्यम से देने के लिए विभिन्न विभागों  के डाटा को भामाशाह से जोड़ा जाता है इस प्रक्रिया को सीडिंग कहते है इसमें आधार , बैंक अकाउंट, संबंधित योजना का नंबर ,पीपीओ न0, नरेगा नंबर इत्यादि को दर्ज किया जाता है इस तरह से विभिन्न योजनाओ के लाभान्वितो की सुचना का  मेल भामाशाह पोर्टल से किया जाता है और डेटाबेस कंप्लीट किया जाता है सीडिंग  के बाद डेटा की क्लीनिंग एवं डाटा का मानकीकरण किया जाता है  जिसमे डाटा की विसंगी को दूर कर एक फॉर्मेट में सूचनाओ का अद्यतन किया जाता है।

करोड़ों महिलाओं के सपने साकार भामाशाह योजना[संपादित करें]

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने जी ने 25 दिसम्बर को देश के पहले ऐसे भामाशाह योजना कार्ड का वितरण शुरू किया जिसमें परिवार की महिला मुखिया के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों की भी पहचान है। अजमेर के पटेल मैदान में आयोजित एक बड़े समारोह में मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे जी ने इस कार्ड से लाभ हस्तान्तरण का भी शुभारंभ किया।

यह योजना प्रदेश की महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में राज्य की भाजपा सरकार की दृढ़-इच्छाशक्ति एवं संकल्प का प्रतीक है। यह योजना करोड़ों महिलाओं के सपने साकार करेगी।

महिलाएं होंगी अब दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी स्वरूपा[संपादित करें]

हमारे देश में महिला को भले ही दुर्गा स्वरूपा कहा जाता हो, लेकिन उसके हाथ में कितनी शक्ति है यह किसी से छिपा नहीं है।

नारी को भले ही हमारे यहां सरस्वती का रूप माना जाता है, परन्तु शिक्षा में महिला अभी भी पिछड़ी हुई है।

हम नारी को लक्ष्मी का पर्याय भी मानते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि लक्ष्मी मानी जाने वाली नारी आर्थिक रूप से सशक्त नहीं है।

यह योजना महिला सशक्तीकरण के प्रति समर्पित है, जो महिलाओं को सही मायने में दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी के रूप में पहचान करवायेगी।

लाभ हस्तांतरण तथा बैंक प्रणाली के साथ जोड़ा[संपादित करें]

15 दिसम्बर, 2014 से मनरेगा, पेंशन, छात्रवृत्ति तथा राशन दुकानों को इस योजना के साथ जोड़ दिया जायेगा। जिन लोगों को भामाशाह कार्ड नहीं मिले हैं उन्हें वर्तमान में मिलने वाली सभी सुविधाएं पहले की तरह मिलती रहेंगी। इस कार्ड को बैंक प्रणाली के साथ जोड़ा गया है। पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आॅफ बड़ौदा, स्टेट बैंक आॅफ बीकानेर एण्ड जयपुर, आईसीआईसीआई, काॅपोर्रेशन तथा इण्डियन ओवरसीज बैंक का आभार, जिन्होंने बैंक प्रणाली के साथ भामाशाह योजना को जोड़कर इसकी काॅ-ब्राडिंग की।

मोबाइल पर मिलेगी हर लेन-देन की सूचना[संपादित करें]

मोबाइल नम्बर पर हर लेन-देन की सूचना उपलब्ध होगी, जब भी किसी प्रकार की लाभ राशि खाते में ट्रांसफर होगी या निकाली जायेगी, तो इसकी सूचना मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से तुरन्त मिलेगी। इससे कार्डधारी महिला को हर लेन-देन की पूर्ण जानकारी रहेगी।

बीपीएल महिला मुखिया को दो हजार रुपये[संपादित करें]

राज्य की भाजपा सरकार इस योजना में हर बीपीएल परिवार की मुखिया महिला के खाते में दो किश्तों में दो हजार रुपये की राशि ट्रांसफर करेगी, इसके लिए राज्य के लगभग डेढ़ करोड़ परिवारों की महिलाओं के नाम से बैंक खाते खोले जा रहे हैं। वितरण के साथ ही बीपीएल मुखिया महिला के खाते में पहली किश्त के एक हजार रुपये डाल दिये जायेंगे। पहली किश्त के 6 महीने बाद पुनः खाते में एक हजार रुपये की दूसरी किश्त ट्रांसफर की जायेगी। इसके अलावा बीपीएल परिवार के जिन सदस्यों के आधार कार्ड बन गये हैं उन्हें प्रति सदस्य 100 रुपये अलग से दिये जायेंगे। हमने इस कार्ड का प्रधानमंत्री की जन धन योजना के साथ एकीकरण भी कर दिया है, जिससे अन्य योजनाओं का लाभ भी मिल सके।

कार्ड के जरिए मिलेगी राशन सामग्री[संपादित करें]

भामाशाह कार्डधारी महिलाएं बायोमैट्रिक पद्धति से राशन की दुकानों से सामग्री भी खरीद सकेंगी। प्रदेश में कुछ राशन की दुकानों पर यह सुविधा दे दी गई है। आने वाले समय में प्रदेश की सभी राशन दुकानों पर यह सुविधा उपलब्ध करवायी जायेंगी। जब तक राशन दुकानदार बायोमैट्रिक पद्धति से राशन सामग्री का वितरण नहीं करेगा तब तक उसको सरकार की ओर से दिये जाने वाले कमीशन का भुगतान नहीं होगा।

10000तीन लाख रुपये तक का मेडिकल बीमा भी[संपादित करें]

जल्द ही भामाशाह कार्ड के माध्यम से गरीबों और वंचित व्यक्तियों के इलाज के लिए 30 हजार से 3 लाख रुपये तक का मेडिकल बीमा भी करवाया जायेगा।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. विभाग, आयोजना (2014). भामाशाह योजना 2014.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]