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बराकज़ई राजवंश

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साँचा:Royal house

बराकज़ई / बराकज़ाई
कुल जनसंख्या
कई लाखों मे
विशेष निवासक्षेत्र
अफगानिस्तान, पश्तूनिस्तान[उद्धरण चाहिए]
भाषाएँ
पश्तून, दरी,
धर्म
मुख्य रूप से सुन्नी इस्लाम

बराकज़ई राजवंश (बाराकज़ाई का अनुवाद: बराक के बेटे)[1] की दो शाखाओं ने 1826 से 1973 तक अफ़गानिस्तान पर शासन किया जब मुसाहिबान मोहम्मद ज़हीर शाह के अधीन राजशाही का अंत हुआ। अहमद शाह दुर्रानी के दुर्रानी राजवंश के सत्ता से हटने के बाद बाराकज़ई राजवंश की स्थापना दोस्त मोहम्मद खान ने की थी। इस युग के दौरान, अफगानिस्तान ने अपने दक्षिण और पूर्व क्षेत्रओ को ब्रिटिश, पश्चिम क्षेत्र को फारस, और उत्तर क्षेत्र को रूस के हाथो खो दिया। अफगानिस्तान के भीतर भी कई संघर्ष हुए, जिनमें तीन प्रमुख एंग्लो-अफगान युद्ध और 1929 का गृहयुद्ध शामिल था।

History and background

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राजनीतिक पृष्ठभूमि

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बराकज़ई राजवंश शासकों की पंक्ति अफ़ग़ानिस्तान में, १९वीं और २०वीं सदियों में। दुर्रानी साम्राज्य को बाद, १९२३ में, गोलमाल था अहमद शाह दुर्रानी का अफ़ग़ान साम्राज्य के डोमेन में, जब बेटे तैमूर शाह के, लाड़ई किया, प्रभुत्व लिए। अफ़ग़ान साम्राज्य ने रोखया था अस्तित्व करन, जैसा एक राष्ट्र-राज्य वार्गे, कोयी वक्त लिए, यह साम्राज्य खंडित संग्रह छोते इकाई का को विघटित हुआ था। दोस्त मुहम्मद ख़ान ने क्ष्रेष्ठता पाना किया, उस के भाई के साथ, सुल्तान मुहम्मद ख़ान, १८२३ में। दोस्त मुहम्मद ख़ान ने बनया बराकज़ई राजवंश, लगभग १८३७ में। उस के बाद, उस के वंशजों ने सरकार किया प्रत्यक्ष उत्तराधिकार से १९२९ तक। जब राजा अमानुल्लाह ख़ान और उस के भाई इनायतुल्ला ख़ान ने त्याना किया और उस के चचेरा मुहम्मद नादिर शाह ने ताज सुराक्षित किया, पराजित हबीबुल्ला कलकणी ने करने के बाद। सभ से प्रमुख और शाक्ति उप्न कबीले ब्राक्ज़ई पठान जनजाति का, मोहम्मदज़ई, जो तो सत्तारूढ़ राजवंश अफ़ग़ानिस्तान १८२३ से १९७२ तक में, से आता है।[2]

दुर्रानी साम्राज्य के जब्ती को पहला, जो ब्राकज़ई राजवंश ने किया, दिल भाईयों (शेर दिल ख़ान, पुर दिल ख़ान, कोहन दिल ख़ान, मेहर दिल ख़ान और रहीम दिल ख़ान) ने पकड़ किया लॉय क़लन्दर को, १८१८ साल में और स्वतंत्रता धोषित किया, जो बना रहा स्वतंत्रता राज्य से १८५५ तक, जब आमिर दोस्त मुहम्मद ख़ान ने एकता कायम किया कांधार को काबुल के साथ।[3]

शुरूआत ब्राकज़ई शासन, काबुल के आमीरात का, मार्च १८२३ मे, अफ़ग़ानों का भूतपूर्व गढ़ पेशावर धाटी ने खो दिया, सिख खालसा सेना, रणजीत मिंह की, लड़ाई नौशहरा की में। अफ़ग़ानों के सेना लड़ाई में, सहायता मिलया था अज़ीम ख़ान तो, सौतेला भाई दोस्त मुहम्मद ख़ान का। बराकज़ई युग के बीच में, अफ़ग़ानिस्तान ने देखया, ब्रिटिश ने कब्ज़ा किया उनहां के इलाका को, दक्षिण और पुर्व में, ईरान ने कब्ज़ा किया पश्चिमी में, और रुस उत्तर में। बहुत समरों अफ़ग़ानिस्तान के बीच में वी, तीन प्रमुख आंगल-अफ़ग़ान युद्धों और १९२८-२९ का गृहयुद्ध् शामिल है।

सन्दर्भ

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  1. ↑ Martin, Mike (2014). An Intimate War: An Oral History of the Helmand Conflict, 1978–2012. Oxford University Press. p. 321. ISBN 978-0199387984. अभिगमन तिथि: 26 July 2016. In Pushtun folklore, Barak, Alak and Popol were brothers who went their separate ways to found tribes in their own namesake with the addition of the—zai (son of) suffix, for example, Barakzai.
  2. ↑ "Afghanistan". CIA. मूल से से 4 जनवरी 2021 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 29 December 2025.
  3. ↑ Trousdale, William B. (8 March 2021). Kandahar in Nineteenth Century. BRILL. ISBN 978-90-04-445222.