फतह सिंह

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
डॉ फतह सिंह

डॉ फतह सिंह (१३ जुलाई १९१३ - ६ फ़रवरी २००८) एक आर्यसमाजी थे जिन्होने वेदों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन किया एवं 'वैदिक इटिमोलॉजी' नामक महान ग्रन्थ की रचना की।

परिचय[संपादित करें]

डॉ फतह सिह का जन्म उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के भदेंग कज्जा गाँव में हुआ था।[1] उन्होने वाराणसी से एमए किया और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से उन्हें डी. लिट. की उपाधि मिली। उन्होने आगरा और कोटा के महाविद्यालयों में हिन्दी और संस्कृत का अध्यापन किया। वे राजस्थान प्राच्य शोध संस्थान के निदेशक थे जहाँ से वे सेवानिवृत्त हुए। सिन्धु घाटी की लिपि को वेदों के आधार पर पढ़ने की कोशिश में उन्हें विश्वप्रसिद्धि मिली।

कृतियाँ[संपादित करें]

उनकी अन्य कृतियाँ हैं-

  • वैदिक एटिमोलॉजी (Vedic Etymology)
  • वैदिक दर्शन
  • सिन्धु घाटी लिपि में ब्राह्मणों और उपनिषदों के प्रतीक
  • वेद विद्या का पुनरुद्धार
  • मानवता को वेदों की देन
  • भावी वेद भाष्य के सन्दर्भ सूत्र
  • ढाई अक्षर वेद के
  • कामायनी सौन्दर्य

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "वेदों के मर्मज्ञ डा. फतह सिंह". मूल से 13 जुलाई 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 13 जुलाई 2019.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]