फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला

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फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला (जन्म २३ जुलाई १९५१) भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हैं। उनका जन्म कराइकुडी, शिवगंगा जिला, तमिल नाडु, भारत में हुआ।

कलीफुल्ला ने २० अगस्त १९७५ को एक वकील की सनद हासिल की, जिसके बाद उन्होंने टी एस गोपालन एंड कंपनी की लॉ फर्म में श्रम कानून मे काम शुरू किया। २ मार्च २००० को, उन्हें मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। फरवरी २०११ में, वह जम्मू और कश्मीर के उच्च न्यायालय के सदस्य बने और दो महीने बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। सितंबर २०११ में, उन्हें जम्मू और कश्मीर के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नामित किया गया था। २ अप्रैल २०१२ को, उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश का पद प्रदान किया गया, जिसकी शपथ उन्हे मुख्य न्यायाधीश सरोश होमी कपाड़िया ने दिलाई। न्यायमूर्ति कलीफुल्ला २२ जुलाई २०१६ को भारत के सर्वोच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त हुए।

८ मार्च २०१९ को अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी विवाद के मामले में मध्यस्थता के लिए तीन सदस्यीय पैनल नियुक्त किया गया; जिसमें कलीफुल्ला, आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रवी शंकर और मध्यस्थता विशेषज्ञ वकील श्रीराम पंचू हैं।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "जानिए कौन हैं जस्टिस इब्राहिम कलीफुल्ला, जो सुलझाएंगे राम मंदिर विवाद का मुद्दा?". न्युज १८. ८ मार्च २०१९. अभिगमन तिथि ११ मार्च २०१९.