प्रसरण

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प्रायिकता और सांख्यिकी के सन्दर्भ में प्रसरण (variance) वह माप है जो दर्शाती है कि दिये गये आंकड़े (संख्यायेँ) कितने बिखरे हुए है। यदि सभी आंकड़े समान हों तो प्रसरण का मान शून्य होगा। प्रसरण का मान कम हो तो यह इंगित करता है कि सभी आंकड़े माध्य के बहुत पास हैं।

परिभाषा[संपादित करें]

प्रसरण को प्रायः Var(X), , या केवल σ2 (उच्चारण:"'सिग्मा स्क्वायर्ड") से निरूपित किया जाता है। किसी एक ही चर राशि के बहुत से मानों के लिए प्रसरण का मान निम्नलिखित प्रकार से निकाला जाता है-

जहाँ:

  • : i_वाँ आंकड़ा
  • : आँकड़ों की संख्या
  • : आँकड़ों का समान्तर माध्य

स्पष्टतः, गणितीय रूप से प्रसरण, मानक विचलन के वर्ग के बराबर है।

यदि इस परिभाषा को किसी यादृच्छ चर (रैण्डम वैरिएबल) पर लागू करें, जिसका समान्तर माध्य μ = E[X] है, तो इसका प्रसरण Var(X) निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित होगा-

इस परिभाषा को और आगे बढ़ाने पर प्रसरण की निम्नलिखित वैकल्पिक (किन्तु समतुल्य) परिभाषा मिलती है-

उदाहरण[संपादित करें]

माना संख्याएँ {-4, -1, 1, 2, 7} दी हुई हैं। इनका समान्तर माध्य

तथा प्रसरण का मान होगा-

तथा

.

प्रसरण के गुण[संपादित करें]

  • जहाँ a और b वास्त्वैक संख्याएँ हैं। इस गुण से यह सिद्ध होता है कि किसी नियतांक का प्रसरण शून्य होता है,
  • , जहाँ Cov(X,Y) X e Y का सहप्रसरण (covariance) है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]