परदेशी वित्तप्रेषण

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परदेशी वित्तप्रेषण (remittance) से आशय किसी दूसरे देश में रह रहे या कार्य कर रहे व्यक्ति द्वारा अपने देश में पैसा (वित्त) भेजने से है।

जब एक प्रवासी अपने मूल देश को बैंक, पोस्ट ऑफिस या ऑनलाइन ट्रांसफर से धनराशि भेजता है तो उसे रेमिटेंस कहते हैं। उदाहरण के लिए खाड़ी के देशों में काम कर रहे भारतीय कामगार या अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में डॉक्टर और इंजीनियर की नौकरी कर रहे प्रवासी भारतीय जब भारत में अपने माता-पिता या परिवार को धनराशि भेजते हैं तो उसे रेमिटेंस कहते हैं। जो देश रेमिटेंस प्राप्त करता है, उसके लिए यह विदेशी मुद्रा अर्जित करने का जरिया होता है और वहां की अर्थव्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है। खासकर छोटे और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को गति देने में रेमिटेंस ने अहम भूमिका निभाई है। कई देश ऐसे हैं, जिनके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में रेमिटेंस से प्राप्त राशि का योगदान अन्य क्षेत्रों के मुकाबले काफी अधिक है। मसलन नेपाल, हैती, ताजिकिस्तान और टोंगा जैसे देश अपने जीडीपी के एक चौथाई के बराबर राशि रेमिटेंस के रूप में प्राप्त करते हैं।

वैसे राशि के हिसाब से देखें तो दुनियाभर में सर्वाधिक रेमिटेंस भारत प्राप्त करता है। ग्लोबल माइग्रेशन रिपोर्ट, 2020 के अनुसार विदेशों में बसे प्रवासी भारतीयों से लगभग 78.6 बिलियन डॉलर रेमिटेंस के रूप में स्वदेश भेजे। रेमिटेंस प्राप्त करने के मामले में भारत के बाद क्रमशः चीन, मैक्सिको, फिलीपींस और मिस्र आते हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]