नेवियर-स्टोक्स समीकरण

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नेवियर-स्टोक्स समीकरण तरल यांत्रिकी के सबसे अधिक उपयोगी समीकरणों में से एक है । यह श्यान (viscous) तरल पदार्थों ( द्रव एवं गैस, दोनों ) की गति को मॉडल करता है। यह समीकरण न्यूटन के गति के द्वितीय नियम को तरल की गति पर लागू करने से प्राप्त होता है।

उपयोग[संपादित करें]

नेवियर-स्टोक्स समीकरण अत्यन्त उपयोगी हैं क्योंकि ये शैक्षिक तथा अर्थशास्त्रीय महत्व वाली बहुत सी भौतिक घटनाओं का सम्यक मॉडल प्रस्तुत करने में सक्षम हैं (या उनका गणितीय वर्णन प्रस्तुत करते हैं) । इनके उपयोग के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • मौसम को मॉडल करने के लिये ,
  • महासागरीय धाराओं के लिये,
  • किसी पाइप में जल-प्रवाह के अध्ययन में,
  • किसी एयरफ्वायल (पंख या विंग) के परितः वायु का प्रवाह का अध्ययन करने के लिये,
  • किसी आकाशगंगा (गैलेक्सी) के अन्दर तारों की गति का अध्ययन,
  • वायुयान एवं कारों की डिजाइन में,
  • धमनी एवं शिराओं में रक्त के प्रवाह के अध्ययन के लिये,
  • शक्ति-संयन्त्रों (पावर स्टेशन) की डिजाइन में,
  • मैग्नेटोहाइड्रोडाइनेमिक्स की समस्याओं के अध्ययन में ( मैक्स्वेल के समीकरणों के साथ संयुक्त रूप से प्रयोग करके)

नेवियर-स्टोक्स समीकरण का स्वरूप[संपादित करें]

किसी जड़ सन्दर्भ तन्त्र (inertial frame of reference) में नेवियर-स्टोक्स समीकरण का सामान्यतम् रूप इस प्रकार है:

\rho \left(\frac{\partial \mathbf{v}}{\partial t} + \mathbf{v} \cdot \nabla \mathbf{v}\right) = -\nabla p + \nabla \cdot\mathbb{T} + \mathbf{f},

यहाँ \mathbf{v} प्रवाह का वेग है; \rho तरल का घनत्व है; p दाब है; \mathbb{T} deviatoric stress tensor है; \mathbf{f} तरल की इकाई आयतन पर लगने वाला देह बल (body force) है ; \nabla डेल् (del) ऑपरेटर है।

उपरोक्त समीकरण वस्तुतः किसी तरल के लिये संवेग संरक्षण का नियम को ही अभिव्यक्त करता है। यह किसी सतत माध्यम (continuum) में न्यूटन की गति के द्वितीय नियम का एक अनुप्रयोग मात्र ही है। यह समीकरण प्रायः इस रूप में भी लिखा जाता है:

\rho \frac{D \mathbf{v}}{D t} = -\nabla p + \nabla \cdot\mathbb{T} + \mathbf{f}.

हल की सांख्यिक विधियाँ[संपादित करें]

प्रांटल ने १९०४ में सीमावर्ती तहों में हो रही गतिविधियों की गणितीय पड़ताल तो की पर उसके कोई ५० साल तक इस दिशा में कोई आशाजनक प्रगति नहीं हुई । बीसवीं सदी में तो तरल गति को हल करने की दिशा में सैद्धांतिक विकास अधिक नहीं हुआ पर इसके गणितीय सांख्यिक हल के लिए सदी के उत्तरार्ध में शोधकर्ताओं को बहुत सफलता मिली । इसके तहत समीकरणों को उनके जटिल रूप में बिना अधिक सरलीकृत किये तथा उनके वास्तविक जटिल ज्यामितीय क्षेत्र में हल करना संभव हो सका । इनमें से पटंकर जैसे शोधकर्ताओं का बहुत योगदान रहा । कुछ गणितीय विधियों के नाम इस प्रकार हैं:

  • SIMPLE (Semi Implicit Method for Pressure Linked Equations [1])
  • SIMPLER (SIMPLE - Revisited)
  • PISO (Pressure Implicit with Splitting of Operators [2])
  • SIMPLEV (SIMPLE - Vincent)

वाह्य सूत्र[संपादित करें]

  • online software list - गणनात्मक तरल यांत्रिकी (CFD) से सम्बन्धित ऑनलाइन सॉप्फ्टवेयरों की सूची ; इसमे नेवियर-स्टोक्स समीकरण को हल करने वाले उपकरण भी सम्मिलित हैं।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Patankar, S.V (1970), A Calculation Procedure for Heat, Mass and Momentum Transfer in 3D Parabolic Flows, 15, प॰ 1787-1806 
  2. Issa, R.I. (1985), "Solution of the Implicitely Descretised Fluid Flow Equations", Journal of Computational Physics 62: 40-65