नीरजा

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नीरजा  
अंतरनाद

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|caption= मुखपृष्ठ |label1= लेखक |data1= महादेवी वर्मा |label2= मूल शीर्षक |data2= |label3= अनुवादक |data3= |label4= चित्र रचनाकार |data4= |label5= आवरण कलाकार |data5= |label6= देश |data6= भारत |label7= भाषा |data7= हिंदी |label8= शृंखला |data8= |label9= विषय |data9= साहित्य |label10= प्रकार |data10= |label11= प्रकाशक |data11= |label12= प्रकाशन तिथि |data12= १९३४
|label13= हिन्दी में
प्रकाशित हुई |data13= |label14= मीडिया प्रकार |data14= |label15= पृष्ठ |data15= |label17= आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ |data17 = |label18= ओसीएलसी क्र. |data18= |label19= पूर्ववर्ती |data19= |label20= उत्तरवर्ती |data20= }} नीरजा महादेवी वर्मा का तीसरा कविता-संग्रह है। इसका प्रकाशन १९३४ में हुआ। इसमें १९३१ से १९३४ तक की रचनाएँ हैं।

नीरजा में रश्मि का चिन्तन और दर्शन अधिक स्पष्ट और प्रौढ़ होता है। कवयित्री सुख-दु:ख में समन्वय स्थापित करती हुई पीड़ा एवं वेदना में आनन्द की अनुभूति करती है।