निशाचरता

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
उल्लू एक निशाचरी प्राणी है

निशाचरता कुछ जानवरों की रात को सक्रीय रहने की प्रवृति को कहते हैं। निशाचरी जीवों में उल्लू, चमगादड़ और रैकून जैसे प्राणी शामिल हैं। कुछ निशाचरी जानवरों में दिन और रात दोनों में साफ़ देखने की क्षमता होती है लेकिन कुछ की आँखें अँधेरे में ही ठीक से काम करती हैं और दिन के वक़्त चौंधिया जाती हैं।

राक्षसों के लिए प्रयोग[संपादित करें]

प्राचीन कथाओं में राक्षसों को भी रात में सक्रीय रहने वाले जीव बताया जाता था, इसलिए कभी-कभी "निशाचर" का अर्थ "राक्षस" निकाला जाता था, जैसा की मैथिलीशरण गुप्त की "पंचवटी" नाम की कविता में देखा जा सकता है -

"वीर-वंश की लाज यही है, फिर क्यों वीर न हो प्रहरी, विजन देश है निशा शेष है, निशाचरी माया ठहरी॥"

अन्य भाषाओँ में[संपादित करें]

"निशाचरी" को अंग्रेजी में "नॉक्टर्नल" (nocturnal), फ़ारसी में "शबज़ी" (شب‌زی‎, यानि "शब/रात वाला") और अरबी में "अल-लैलई" (اللَيْلِي‎, यानि "लैला/रात वाला") कहा जाता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]