नान्यदेव

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नान्यदेव
मिथिला नरेश
शासनावधि1097–1147 ई.
पूर्ववर्तीसंस्थापक
उत्तरवर्तीमल्ल देव
निधनसिमराँवगढ़
घरानाकर्नाट वंश

नान्यदेव[1] कर्नाट वंश के संस्थापक और पहले राजा थें[2][3] और हरिसिंह देव के पूर्वज थें। उसने अपनी राजधानी सिमराँवगढ़ में स्थापित की और 50 वर्षों तक मिथिला क्षेत्र पर शासन किया।[4] वह अपनी उदारता, साहस और विद्वानों के संरक्षण के लिए जाने जाते हैं।[5] वह कर्नाट क्षत्रिय कुल से थे और 1097 ई. में सिमराँवगढ़ से मिथिला पर शासन करने लगे। सिमराँवगढ़ और नेपालवंशावली में पाए गए पत्थर के शिलालेख में स्पष्ट रूप से लिखा है[6] कि उन्होंने श्रावण माह में शनिवार को सिंह लग्न, तिथि शुक्ल सप्तमी, नक्षत्र स्वाति में और शक संवत 1019(10 जुलाई, 1097 ई.) में एक स्तंभ बनाया।[7][8]

साहित्यिक कार्य[संपादित करें]

उन्होंने कई धुनों को बनाया और संस्कृत के काम, सरस्वती हृदयालंकार और ग्रंथ-महर्षि में अपना ज्ञान दर्ज किया।[9][10][11] मिथिला का शासक बनने के बाद उन्होंने यह काम पूरा किया।

वंशज[संपादित करें]

उत्तर बिहार (जो मिथिला क्षेत्र का हिस्सा है) के कई राजपूत जमींदार, विशेष रूप से सहरसा जिले में नान्यदेव को अपना पूर्वज होने का दावा करते हैं।[12]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Smith, Vincent A. (1999). The Early History of India (अंग्रेज़ी में). Atlantic Publishers & Dist. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788171566181.
  2. Sinha, Bindeshwari Prasad (1977). Dynastic History of Magadha, Cir. 450-1200 A.D. (अंग्रेज़ी में). Abhinav Publications.
  3. Bihar (India); Choudhury, Pranab Chandra Roy (1964). Bihar District Gazetteers: Darbhanga (अंग्रेज़ी में). Superintendent, Secretariat Press, Bihar.
  4. Jha, Makhan (1997). Anthropology of Ancient Hindu Kingdoms: A Study in Civilizational Perspective (अंग्रेज़ी में). M.D. Publications Pvt. Ltd. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788175330344.
  5. "८ सय वर्षमा नमासिएको सिम्रौनगढ ८ महिनामा ध्वस्त" [Simraungadh, which was not destroyed in 800 years was destroyed in 8 months]. www.museumassociation.org.np. अभिगमन तिथि 2019-04-18.
  6. Kamal P. Malla (1985). Nepālavaṃśāvalī: A Complete Version of the Kaisher Vaṃśāvalī. CNAS Journal. Vol. 12 No. 2. Kathmandu: Tribhuvan University. pp. 75-101.
  7. Sahai, Bhagwant (1983). "Inscriptions Of Bihar".
  8. Shrestha, Shiv Raj. "Nanyadeva, his ancestors and their Abhijana (Original Homeland)" (PDF) (English में).
  9. Rajagopalan, N. (1992). "Another Garland (Book 2)". Carnatic Classicals,Madras.
  10. Paniker, K. Ayyappa (1997). Medieval Indian Literature: Surveys and selections (अंग्रेज़ी में). Sahitya Akademi. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788126003655.
  11. Madhubani Painting (अंग्रेज़ी में). Abhinav Publications. 2003. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788170171560.
  12. Choudhary, Radhakrishna (1970). History of Muslim rule in Tirhut, 1206-1765, A.D. Chowkhamba Sanskrit Series Office. पपृ॰ 28–29. अभिगमन तिथि 30 April 2019.