दिलरस बानो बेगम

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दिलरस बानो बेगम
دلرس‌ بانو بیگم
सफ़वी शहज़ादी
Female musicians wedding of Aurangzeb.jpg
दिलरस बानो के विवाह के दौरान रक़स करने वालों का नज़ारा
जन्मल. 1622
निधन8 अक्टूबर 1657 (उम्र 34–35)
औरंगाबाद, हिन्दुस्तान
समाधि
बीबी का मक़बरा, औरंगाबाद
जीवनसंगीऔरंगज़ेब
संतानज़ेबुन्निसा
ज़ीनतुन्निसा
ज़ुब्तुन्निसा
मुहम्मद आज़म शाह
सुल्तान मुहम्मद अकबर
पूरा नाम
दिलरस
घरानासफ़वी राजवंश (पैदाइश से)
तैमूरी (विवाह से)
पिताशाहनवाज़ सफ़वी
मातानौरस बानो बेगम
धर्मशिया इस्लाम

दिलरस बानो बेगम (फ़ारसी: دلرس‌ بانو بیگم, उर्दू: دلرس بانو بیگم) (ल. 1622 – 8 अक्टूबर 1657) मुग़ल राजवंश के आख़िरी महान शहंशाह औरंगज़ेब[1] की पहली और मुख्य बीवी थीं।[2][3][4][5] उन्हें अपने मरणोपरांत ख़िताब राबिया उद्दौरानी ('उस युग की राबिया') के नाम से भी पहचानी जाती है। औरंगाबाद में स्थित 'बीबी का मक़बरा', जो ताज महल (औरंगज़ेब की माँ यानि दिलरस बेगम की सास मुमताज़ महल का मक़बरा) की आकृति पर बनवाया गया, उनकी आख़िरी आरामगाह के तौर पर अपने शौहर का हुक्म पर निर्मित हुआ था।

दिलरस मिर्ज़ा बदीउद्दीन सफ़वी और नौरस बानो बेगम की बेटी थीं, और इसके परिणामस्वरूप वे सफ़वी राजवंश की शहज़ादी थीं। 1637 में उनके विवाह तत्कालीन शहज़ादा मुहिउद्दीन (तख़्तनशीन होने के बाद 'औरंगज़ेब' के नाम से प्रसिद्ध) से करवाया गया था और उनकी पाँच औलाद की पैदाइश हुई; जिनमें मुहम्मद आज़म शाह[6] (मुग़लिया सल्तनत के आर्ज़ी वलीअहद), होशियार शायरा ज़ेबुन्निसा (औरंगज़ेब की पसंदीदा बेटी),[7] शहज़ादी ज़ीनतुन्निसा (ख़िताब: पादशाह बेगम), और सुल्तान मुहम्मद अकबर (बादशाह के सर्वप्रिय बेटे)।[8]

साल 1657 में संभवतः जच्चा संक्रमण की वजह से उनकी मौत हो गई।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Aurangzeb". Encyclopædia Britannica. अभिगमन तिथि 18 January 2013.
  2. Eraly, Abraham (2007). The Mughal World: Life in India's Last Golden Age. Penguin Books India. पृ॰ 147.
  3. Chandra, Satish (2002). Parties and politics at the Mughal Court, 1707-1740. Oxford University Press. पृ॰ 50.
  4. Koch, Ebba (1997). King of the world: the Padshahnama. Azimuth Ed. पृ॰ 104.
  5. Nath, Renuka (1990). Notable Mughal and Hindu women in the 16th and 17th centuries A.D. New Delhi: Inter-India Publ. पृ॰ 148.
  6. Sir Jadunath Sarkar (1925). Anecdotes of Aurangzib. M.C. Sarkar & Sons. पृ॰ 21.
  7. Krynicki, p. 73
  8. Sir Jadunath Sarkar (1919). Studies in Mughal India. W. Heffer and Sons. पृ॰ 91.