तृतीय आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध

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काबुल के स्वर्गीय राजा शाह शुजा उल मुल्क के महल की आंतरिक भाग। तृतीय आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध की परिणति अफ़ग़निस्तान की स्वतंत्रता मे हुई। 1917 की रूस की क्रांति के बाद रूस और ब्रिटेन साथी नही रहे। अफ़ग़ानो ने ब्रिटिश सेना पर अचानक हमला बोल दिया। हलांकि ब्रिटिशों ने हवाई आक्रमण का सहारा लिया और राजा तक के महल पर बमबारी की। इससे अफ़गानिस्तान की जनता में भारी रोष उत्पन्न हुआ। अंततः 1921 में अफ़ग़ानिस्तान स्वाधीन हो गया।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]