तीतर

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तीतर फ़ॅसिअनिडी कुल के पक्षी हैं जिसे अंग्रेज़ी में आम भाषा में फ़ीज़ेन्ट कहते हैं। भारत की भाषाओं में फ़्रैंकोलिन और पार्ट्रिज में कोई भेद नहीं है और इन दोनों को तीतर ही कहा जाता है। विश्व भर में इसकी कई प्रजातियाँ हैं और इनमें से कुछ प्रजातियाँ सिर्फ़ भारत में ही पाई जाती हैं।

ये आमतौर पर खेतों मे,जंगलों में या उँचे स्थानों पर घोसला बनाती हैं । खेतों में कीटनाशकों का उपयोग , कृषि के मशीनीकरण के कारण इनको भोजन हेतु कीटों तथा घोसलों एक के नष्ट होने के कारण इनकी संख्या लगातार घट रही है।ये एक बार में 4 से 10 अंडे देते हैं । इनके चूजें पंद्रह दिन में उड़नें लगते हैं।

संस्कृति में[संपादित करें]

  • यजुर्वेद की दो प्रमुख शाखाओं में से एक तैत्तिरीय शाखा कहा जाता है जो तीतर की तरह ज्ञान चुनने (चुगने) के लिए नामित है। उसी शाखा के द्वारा तैत्तरीय उपनिषद लिखा गया है।