तर्क-वितर्क

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तर्क-वितर्क (reasoning) चेतना द्वारा चीज़ों को समझने, तथ्यों को स्थापित व प्रमाणित करने, तर्क का प्रयोग करने और व्यवहारों तथा विश्वासों के कारण समझने व उन्हें बदलने की प्रक्रिया को कहते हैं। कई मानवीय कार्य व अध्ययन - जिनमें दर्शनशास्त्र, विज्ञान, भाषा, गणित और कला शामिल हैं - तर्क-वितर्क की शक्ति पर निर्भर हैं और यह सक्षमता अक्सर मानवों को पृथ्वी के अन्य प्राणियों से भिन्न करने वाला एक महत्वपूर्ण गुण माना जाता है।[1][2]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Kompridis, Nikolas (2000). "So We Need Something Else for Reason to Mean". International Journal of Philosophical Studies 8: 271–295. doi:10.1080/096725500750039282. 
  2. MacIntyre, Alasdair (2013). Dependent Rational Animals: Why Human Beings Need the Virtues. The Paul Carus Lectures. Open Court. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780812697056. https://books.google.com/books?id=Jv9Jx5iQ4uYC. अभिगमन तिथि: 2014-12-01. "[...] the exercise of independent practical reasoning is one essential constituent to full human flourishing."