डार्विनवाद
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डार्विनवाद जीवों के विकास से संबंधित एक वैज्ञानिक सिद्धांत है, जिसे चार्ल्स डार्विन ने प्रस्तुत किया था। यह सिद्धांत बताता है कि जीव समय के साथ प्राकृतिक चयन (Natural Selection) की प्रक्रिया द्वारा बदलते और विकसित होते हैं।
डार्विन ने अपने विचारों को 1859 में प्रकाशित पुस्तक On the Origin of Species में प्रस्तुत किया। डार्विनवाद आधुनिक विकासवाद का आधार माना जाता है।
मुख्य सिद्धांत
[संपादित करें]- जीवों में भिन्नताएँ पाई जाती हैं।
- वातावरण के अनुसार अनुकूल जीव अधिक समय तक जीवित रहते हैं।
- उपयोगी गुण अगली पीढ़ियों में पहुँचते हैं।
सन्दर्भ
[संपादित करें]बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]- 4028073,00.html डार्विन के विकासवाद की प्रासंगिकता[मृत कड़ियाँ]
- आखिर सुलझी डार्विन के भ्रम की गुत्थी[मृत कड़ियाँ] (कल्लोल चक्रवर्ती ; अमर उजाला)
- डार्विन के चूल्हे पर जीवन की खिचड़ी
- Universal Darwinism
- Stanford Encyclopedia of Philosophy entry
- What is Darwinism
- डार्विन, विकासवाद और मज़हबी रोड़े - भूमिका
- यदि विकासवाद जीतता है तो इसाइयत बाहर हो जायगी
- विकासवाद उष्मागति के दूसरे नियम का उल्लंघन करता है!
- सृष्टि व ब्रह्मांड: उत्पत्ति (भाग १) (वैज्ञानिक सिद्धान्त)
- सृष्टि व ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति भाग -२ (वैदिक विचार)
- विकसित होता विकासवाद[मृत कड़ियाँ] (कल्कि आन हिन्दी)
- ↑ Darwin, Charles (1859). On the Origin of Species. London: John Murray.
- ↑ "Darwinism". Encyclopaedia Britannica. अभिगमन तिथि: 9 May 2026.
- ↑ "Darwinism". Biology Dictionary. अभिगमन तिथि: 9 May 2026.[मृत कड़ियाँ]