झाऊ
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| झाऊ | |
|---|---|
| ईरान में टमैरिक्स अफ़िला (Tamarix aphylla) जाति | |
| वैज्ञानिक वर्गीकरण | |
| जगत: | पादप |
| अश्रेणीत: | पुष्पी पादप (Angiosperms) |
| अश्रेणीत: | युडिकॉट (Eudicots) |
| अश्रेणीत: | (Core eudicots) |
| गण: | कैरियोफ़िलालीस (Caryophyllales) |
| कुल: | टमैरिकेसिए (Tamaricaceae) |
| वंश: | टैमैरिक्स (Tamarix) लीनियस[1] |
| जातियाँ | |
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५० - ६० भिन्न जातियाँ | |
झाऊ (tamarisk) सपुष्पक पौधों की ५०-६० जीववैज्ञानिक जातियों वाला एक जीववैज्ञानिक कुल है, जो औपचारिक रूप से टमैरिकेसिए (Tamaricaceae) कहलाता है। यह जातियाँ एशिया, यूरोप और अफ़्रीका के शुष्क इलाकों में पाई जाती हैं।[2] उत्तर भारत में यह बहुत क्षेत्रों में फैला हुआ वृक्ष है।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]- सपुष्पक पौधा
- फरेडा (राजस्थान में):- मारवाड़ी में इस पेड़ को फरेडा नाम से पुकारते हैं। ये पेड़ घनी छाया वाला होता है। ये राजस्थान में काफी जगह देखने को मिल सकता है। फरेडा पेड़ अत्यधिक छायादार होने के कारण राजस्थान के लोग इसको घर के आगे लगाते हैं जो कि गर्मियों में ठंडक दे सके। और गर्मियों में खासकर मवेशियों को इसके नीचे बांध जाता है ताकि गर्मियों से बचाया जा सके। फरेडा पेड़ सालभर हरा भरा रहता है जो दिखने में अलग और शानदार देखने को मिलता है।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Genus: Tamarix L." Germplasm Resources Information Network. United States Department of Agriculture. 1998-04-28. मूल से से 23 सितंबर 2015 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2011-02-18.
- ↑ Baum, Bernard R. (1978), "The Genus Tamarix", The Israel Academy of Science and Humanities