जलालुद्दीन ख्वारिज्म शाह

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जलालुद्दीन ख्वारिज़्म शाह ख्वारिज्मी साम्राज्य का अन्तिम शासक था।

परिचय[संपादित करें]

वह सुलतान मुहम्मद ख्वारिज़्म शाह का ज्येष्ठ पुत्र और वंश का अंतिम शासक था। मुहम्मद की मृत्यु के पश्चात् जलालुद्दीन के अन्य भाइयों ने मंगोलों की सहायता से इसके विरुद्ध षड्यंत्र रचा, इसलिये यह भागकर अफगानिस्तान चला गया। गजनी में इसने ६०,००० तुर्को को एकत्रकर सेना तैयार की। चंगेज खाँ (मंगोल) ने इसका पीछा किया। यह भागकर भारत आया (१२२१) और अल्तमश से संधि के असफल प्रयत्न किए। ३ वर्ष भारत में रहकर १२२४ में वह किरमान पहुँचा। यहाँ से चलते हुए उसने खुजिस्तान पार किया, जहाँ खलीफा अल नासिर से उसकी टक्कर हुई। १२२५ में उसने अजरबैजान के शासक उजबेग को पराजित कर उसकी राजधानी तबरीज पर अधिकार कर लिया। धीरे-धीरे आसपास के आकेश्स, किरमान और अखलात पर भी अधिकार कर लिया। इसी समय फारस में मंगोंलों के विरुद्ध इसे पुन: युद्ध करना पड़ा। तुरंत बाद अल अशरफ और कैकुबाद की संमिलित शक्तियों से पराजित होकर अजरबैजान चला गया किंतु मंगोलों के कारण उसे शांति नहीं मिली। अखलात होते हुए आमिद की ओर वह भागा। किंतु मंगोलों ने एक रात चुपके से आक्रमण किया, युद्ध में जलालुद्दीन मारा गया। कुछ समय में उसकी मृत्यु के संबंध में दो मत हो गए। कुछ ने अपने को ही जलालुद्दीन ख्वारिज्म शाह कहना आरंभ कर दिया था।