छिपकली

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छिपकली स्क्वमाटा जीववैज्ञानिक गण के सरीसृप प्राणियों का एक उपगण है, जिसमें अंटार्कटिका के अलावा लगभग विश्व भर के हर बड़े भू-भाग में मिलने वाली लगभग ६००० ज्ञात जातियाँ शामिल हैं। ध्यान दें कि सर्प भी स्क्वमाटा गण के सदस्य होते हैं और छिपकली व सर्प दोनों एक ही पूर्वज के वंशज हैं लेकिन परिभाषिक रूप से सर्पों को छिपकली नहीं समझा जाता।[1][2][3]

शरीर[संपादित करें]

चित्|अंगूठाकार|भारतीय छिपकली

छोटे-छोटे शल्कों से ढँका शरीर सिर-गर्दन, धड़ और पूँछ चार भागों में बँटा होता है। धड़ में चार पैर होते हैं, जिनमें नखयुक्त अंगुलियाँ पाई जाती हैं। धड़ एवं पूँछ के जोड़ के अधरतल पर एक क्लोएका छिद्र होता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Gibbons, J. Whitfield; Gibbons, Whit (1983). Their Blood Runs Warm: Adventures With Reptiles and Amphibians. Alabama: University of Alabamain Press. p. 164. ISBN 978-0-8173-0135-4.
  2. James Macartney: Table III in: George Cuvier (1802) "Lectures on Comparative Anatomy" (translated by William Ross under the inspection of James Macartney). Vol I. London, Oriental Press, Wilson and Co.
  3. Alexandre Brongniart (1800) "Essai d’une classification naturelle des reptiles. 1ère partie: Etablissement des ordres." Bulletin de la Science. Société Philosophers de Paris 2 (35): 81-82