चौरी चौरा कांड

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
(चौरीचौरा काण्ड से अनुप्रेषित)
Jump to navigation Jump to search
चौरी-चौरा का शहीद स्मारक

चौरी चौरा, उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के पास का एक कस्बा है जहाँ 5 फ़रवरी 1922 को भारतीयों ने ब्रिटिश सरकार की एक पुलिस चौकी को आग लगा दी थी जिससे उसमें छुपे हुए 22 पुलिस कर्मचारी जिन्दा जल के मर गए थे। इस घटना को चौरीचौरा काण्ड के नाम से जाना जाता है। इसके परिणामस्वरूप गांधीजी ने कहा था कि हिंसा होने के कारण असहयोग आन्दोलन उपयुक्त नहीं रह गया है और उसे वापस ले लिया था।[1] चौरी-चौरा कांड के अभियुक्तों का मुक़दमा पंडित मदन मोहन मालवीय ने लड़ा और उन्हें बचा ले जाना उनकी एक बड़ी सफलता थी।[2]

परिणाम[संपादित करें]

इस घटना के तुरन्त बाद गांधीजी ने असहयोग आन्दोलन को समाप्त करने की घोषणा कर दी। बहुत से लोगों को गांधीजी का यह निर्णय उचित नहीं लगा।[1] विशेषकर क्रांतिकारियों ने इसका प्रत्यक्ष या परोक्ष विरोध किया। [1] 1922 की गया कांग्रेस में प्रेमकृष्ण खन्ना व उनके साथियों ने रामप्रसाद बिस्मिल के साथ कन्धे से कन्धा भिड़ाकर गांधीजी का विरोध किया।

इस आंदोलन के बाद से स्वतंत्रता सेनानी दो दलों में बाँट गए थे। पहला गरम दल और दूसरा नरम दल । गरम दल के नेता जहां चंद्रशेखर आजाद , भगत सिंह, जैसे व्यक्ति थे तो वहीं नरम दल के नेताओं में स्वयं महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू शामिल थे।

अंग्रेजी सरकार ने इस घटना के बाद 225 लोगों को गिरफतार किया जिनमे से 170 लोगों को मौत की सजा सुनाई। परंतु मदन मोहन मलवीयजी ने उन लोगों के लिए केस लड़ा और 151 लोगों को निर्दोष साबित करने में सफल रहे।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Rajshekhar Vyas. Meri Kahani Bhagat Singh: Indian Freedom Fighter. Neelkanth Prakashan. पपृ॰ 33–. GGKEY:JE4WZ574KU2.
  2. Manju 'Mann'. Mahamana Pt Madan Mohan Malviya. पपृ॰ 124–. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-93-5186-013-6.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]