चौरी चौरा

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

चौरी चौरा उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के पास का एक कस्बा है जहाँ 4 फ़रवरी 1922 को[1] भारतीयों ने बिट्रिश सरकार की एक पुलिस चौकी को आग लगा दी थी जिससे उसमें छुपे हुए 22 पुलिस कर्मचारी जिन्दा जल के मर गए थे। इस घटना को चौरीचौरा काण्ड के नाम से जाना जाता है। इसके परिणामस्वरूप गांधीजी ने कहा था कि हिंसा होने के कारण असहयोग आन्दोलन उपयुक्त नहीं रह गया है[2] और उसे वापस ले लिया था। चौरी चौरा की इस घटना से महात्मा गाँधी द्वारा चलाये गये असहयोग आन्दोलन को आघात पहुँचा, जिसके कारण उन्हें असहयोग आन्दोलन को स्थागित करना पड़ा, जो बारदोली, गुजरात से शुरू किया जाने वाला था।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. राजशेखर (4 फ़रवरी 2013). "चौरी-चौरा राष्ट्रीय इतिहास का एक लावारिस पन्ना– News18 India". News18 India. अभिगमन तिथि 20 दिसम्बर 2017.
  2. चौरीचौरा कांड ने ही बनाया था भगत-राजगुरु और सुखदेव को गरम दल का क्रांतिकारी - दैनिक भास्कर

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]